

Contaminated Water Diseases In Gondia: गोंदिया में बारिश के मौसम में दूषित पानी के कारण जलजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। डायरिया, टायफाइड और पीलिया जैसी बीमारियों को समय पर नियंत्रित नहीं किया गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है। गोंदिया जिले में जनवरी से जुलाई तक डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, टायफाइड और तीव्र अतिसार के कुल 406 मरीज सामने आए हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी मरीजों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया है और वर्तमान में जिले की स्थिति नियंत्रण में है।
गोंदिया जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सात महीनों में तीव्र अतिसार के सर्वाधिक 239 मरीज दर्ज किए गए। इसके अलावा टायफाइड के 71, मलेरिया के 67, डेंगू के 15 और चिकनगुनिया के 14 मरीज सामने आए। बारिश के दौरान जलस्रोतों में दूषित पानी मिलने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की शुद्धता और नियमित जांच को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत है।
नागरिकों का कहना है कि कई स्थानों पर रोकथाम के उपाय केवल ब्लीचिंग पाउडर के इस्तेमाल तक सीमित दिखाई देते हैं। जलस्रोतों की नियमित जांच और स्थायी उपाय किए जाने की आवश्यकता है।
गोंदिया जिले में परिचारिकाओं और मलेरिया वर्करों के करीब 350 पद रिक्त बताए जा रहे हैं। इससे विशेषकर दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव पड़ने की आशंका है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डॉक्टरों की कमी नहीं है और अधिकांश डॉक्टरों की नियुक्ति संविदा पद्धति से की गई है।
अति दुर्गम मुरकुटडोह और दंडारी क्षेत्र में कुछ समय पहले मलेरिया के मामले बढ़ने से चिंता की स्थिति बनी थी। मुरकुटडोह-1, 2 व 3, दंडारी और टेकाटोला सहित पांच गांवों में स्थानीय स्तर पर करीब 45 लोगों के संक्रमित होने की जानकारी सामने आई थी, जबकि स्वास्थ्य केंद्र के रिकॉर्ड में 28 मरीज दर्ज होने की बात कही गई। आशा सेविकाओं ने घर-घर जाकर रक्त के नमूने एकत्र किए थे। विभाग के अनुसार अब क्षेत्र में मलेरिया नियंत्रण में है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत 45 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 263 स्वास्थ्य उपकेंद्र कार्यरत हैं। दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए भ्रमणशील चिकित्सा दल भी सक्रिय हैं। विभाग के अनुसार स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। बारिश शुरू होते ही पानी की जांच भी की जा रही है। विभाग का दावा है कि पिछले वर्ष की तुलना में मलेरिया के मरीज कम हुए हैं और जिले में संक्रामक रोगों की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।