GONDIA NEWS
Gondia News: महाविकास आघाड़ी सरकार ने महुआ से प्रतिबंध हटाकर किसानों के लिए आय का एक और माध्यम उपलब्ध कराया था. पर महुआ खरीदी के लिए कोई विशेष प्रबंध न होने के कारण निर्णय के बाद भी किसानों को महुआ बेचने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ रही है. महाराष्ट्र राज्य में महाआघाड़ी सरकार के कार्यकाल में महुआ से प्रतिबंध तो हटा दिया गया जो एक अच्छा निर्णय था.
अब महुआ फूल का मौसम आ गया है, यह मई माह तक चलता है. किसान और मजदूर मेहनत कर महुआ चुनकर और उसे बेच कर अपना उदर निर्वाह करते है. सरकारी स्तर पर महुआ खरीदी केंद्र शासन द्वारा प्रारंभ नहीं किए जाने से गरीब लोगों को कम दाम पर महुआ बेचना पड़ रहा है.
जबकि सभी को उम्मीद थी महुआ से प्रतिबंध हटने के बाद सरकार आदिवासी विकास महामंडल के माध्यम से महुआ खरीदी करेगी पर अब तक ऐसी कोई ठोस नीति न होने के कारण अच्छे निर्णय के बाद भी पहले जैसी ही स्थिति बनी है. विविध प्रकार के बनाए जाते हैं पदार्थ महुआ से विविध प्रकार के पदार्थ बनाए जाते हैं.
उस पर आधारित उद्योग भी खोले जा सकते हैं. डिस्टलरी शराब बनाने के कारखाने खोले जा सकते हैं. जिससे हजारों लोगों को रोजगार प्राप्त हो सकता है. चंद्रपुर, गढ़चिरोली जिले में इस प्रकार के उद्योग निजी या सरकारी क्षेत्र में प्रारंभ करने के प्रयास किए जा रहे हैं.
जिले में भी महुआ, तनस पर आधारित उद्योग शुरू होने से रोजगार मिलेगा. जिले की विभिन्न तहसीलों में महुआ उत्पादन बड़ी तादाद पर होता है. इस दृष्टि से महुआ खरीदी केंद्र शुरू होने चाहिए उसी प्रकार इस पर आधारित उद्योग भी प्रारंभ करने की अत्यंत आवश्यकता है. आय का साधन लोग सुबह उठकर महुआ पेड़ों के पास पहुंच जाते है, ताकि महुआ पेड़ से गिरे हुए फूल मवेशी के खाने के पहले उन्हें मिल सकें.
महुआ आमदनी का साधन है. लोग कच्चा महुआ बीनकर उसे धूप में सुखाते हैं, उसके बाद बाजार में ले जाकर बिक्री करते हैं. जिले के ग्रामीण व जंगलों में महुआ के पेड़ मौजूद हैं. मार्च में होली के बाद महुआ के पेड़ पर फूल लग जाते हैं. जैसे ही तापमान में बढ़ोत्तरी होती है, वैसे ही फूल गिरने लगते हैं. इन्हें संग्रहित कर ग्रामीण पहले उसे सूखा रहे हैं.