समानता ही मानवीय जीवन का आधार: एस. एन. मोर कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन
डॉ. राहुल भगत ने समानता के महत्व पर जोर दिया। इंटरनेशनल महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं के अधिकारों की बात की गई।
Gondia News: समानता ही इंसानी जिंदगी की बुनियाद है। यह कथन एस. एन. मोर कॉलेज के प्रभारी प्रिंसिपल डॉ. राहुल भगत का है। उन्होंने कहा कि समानता के सिद्धांत को अपनाना ही इंसान की खासियत है।
गोंदिया एजुकेशन इंस्टीट्यूट द्वारा चलाए जा रहे सेठ नरसिंहदास मोर आर्ट्स, कॉमर्स एवं श्रीमती गोदावरी देवी सराफ साइंस कॉलेज की महिला विंग ने इंटरनेशनल महिला दिवस मनाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्रभारी प्रिंसिपल डॉ. राहुल भगत ने की। इस अवसर पर डॉ. भारती काटेखाये, डॉ. आरती साल्वे, डॉ. अरुणा बावनकर, और डॉ. रेणुकादास उबाले भी उपस्थित थे।
सम्बंधित ख़बरें
गोंदिया के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के 399 पद खाली
गोंदिया के ग्रामीण अस्पतालों में 399 पद रिक्त, वायरल-मलेरिया के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
कालीसराड़ के घने जंगल में तबाही का मंजर, तेज आंधी-तूफान से 2 हजार से अधिक पुराने पेड़ जमींदोज
गोंदिया बाजार समिति में अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, सभापति-उपसभापति के खिलाफ लामबंद हुए 13 संचालक
डॉ. भगत ने कहा कि पुरुष एवं महिलाओं में कुछ नेचुरल एवं बायोलॉजिकल अंतर होते हैं, लेकिन सोचने-समझने की क्षमता में कोई अंतर नहीं होता। समाज में औरतों को दोयम दर्जे का माना जाना गलत है।
वर्तमान के युवाओं को किसी भी तरह से महिला एवं पुरुषों में भेदभाव नहीं करना चाहिए। डॉ. आरती साल्वे ने कहा कि महिलाओं को ग्लोबल स्टेज पर अपने हक के लिए बड़ी लड़ाई लड़नी पड़ी है।
डॉ. रेणुकादास उबाले ने कहा कि जेंडर इनइक्वालिटी का मुद्दा सिर्फ महिलाओं का नहीं, बल्कि पूरे समाज की समस्या है।
कार्यक्रम में क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले, महात्मा ज्योतिराव फुले, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर, और ताराबाई शिंदे जैसे महान लोगों की सोच पर रोशनी डाली गई।
कॉलेज की महिला कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। संचालन रितु तुरकर ने किया और आभार डॉ. अरुणा बावनकर ने माना।
