Gondia News: अर्जुनी मोरगांव, त.सं. तहसील के नवेगांवबांध क्षेत्र में धान की फसल पर करपा फफूंदजन्य रोग का बड़े पैमाने पर प्रकोप देखा जा रहा है.मार्च में अचानक बढ़े तापमान और मौसम के बारबार बदलते मिजाज के कारण हरीभरी धान की फसल पीली पड़कर सूखने लगी हैं. हाथ में आई फसल आंखों के सामने नष्ट होते देख धान उत्पादक किसान चिंतित है.
पहले से ही आर्थिक संकट में फंसे हुए किसानों पर दोहरी मुसीबत आ गई है. खरीफ सीजन में धान की बिक्री को उचित दाम न मिलने के कारण कई किसानों ने कर्ज लेकर ग्रीष्मकालीन धान की खेती की थी.
इस फसल से कुछ राहत मिलेगी, ऐसी उम्मीद किसानों ने की थी. लेकिन, तापमान में अचानक वृद्धि और वातावरण में बदलाव के कारण करपा रोग का प्रकोप बढ़ने से फसल की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगी हैं, जिससे उत्पादन पर बड़ा असर होने की आशंका जताई जा रही है.
इस गंभीर स्थिति में कृषि विभाग से अपेक्षित मार्गदर्शन न मिलने से किसानों में नाराजगी व्यक्त हो रही है. किसानों के खेतों पर जाकर तुरंत और समुचित उपाय योजना, सही दवा छिड़काव के बारे में मार्गदर्शन करना आवश्यक होते हुए भी तंत्र निष्क्रिय होने का आरोप लगाया जा रहा है.
फसलों का निरीक्षण करने की मांग कई किसान निजी कृषि केंद्रों की सलाह पर महंगी दवाइयों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है. नवगांव बांध क्षेत्र के किसानों ने सरकार से तुरंत ध्यान देने की मांग की है.
कृषि विभाग द्वारा तुरंत फसलों का निरीक्षण कर उचित मार्गदर्शन दिया जाए तथा नुकसानग्रस्त किसानों को आर्थिक सहायता घोषित की जाए. ऐसी मांग किसानों ने की है. पैसे भी पूरे नहीं मिले खरीफ की धान की अभी तक पूरी गिनती नहीं हुई है, जो धान की गिनती की गई है, उसके भी पैसे पूरे नहीं मिले हैं.
युवराज तरोणे, युवा किसान, नवेगांवबांध ने कहा कि मक्का की खरीद केंद्र शुरू होने का भी कोई संकेत नहीं है. ऐसी स्थिति में अगर गर्मी के धान की बिक्री से कुछ पैसे मिल जाते, तो कर्ज कम करके अगले सीजन की तैयारी की जा सकती थी. लेकिन करपा रोग के कारण यह भी हमारा सपना टूट गया है. सरकार तुरंत उचित मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता घोषित करें.