बिरसीफाटा में गहराया जल संकट, सूखते कुएं और बंद बोरवेल से ग्रामीण परेशान
Water Crisis: भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण बिरसीफाटा तथा आसपास के गांवों में पेयजल संकट गंभीर होता जा रहा है। अधिकांश कुएं सूखने की कगार पर हैं और कई बोरवेल बंद पड़े हैं।
Water Crisis (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Birsifata Water Crisis: भीषण गर्मी और लगातार घटते भूजल स्तर के कारण बिरसीफाटा सहित आसपास के कई गांवों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। क्षेत्र के अधिकांश कुओं का जलस्तर तेजी से नीचे चला गया है, जिससे ग्रामीणों के सामने पानी की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। कई गांवों में लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार गांवों में पूर्व में बनाए गए अधिकांश बोरवेल वर्तमान में बंद पड़े हैं या पर्याप्त पानी नहीं दे रहे हैं। गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। आने वाले दिनों में जलसंकट विकराल रूप धारण कर सकता है, जिससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल व्याप्त है।
हर घर नल योजना पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि शासन की महत्वाकांक्षी हर घर नल योजना क्षेत्र में पूरी तरह विफल साबित हुई है। कई गांवों में लाखों रु। खर्च कर जलमीनार और जलकुंभ तो बनाए गए, लेकिन आज तक घरों के नलों में नियमित रूप से पानी नहीं पहुंच पाया। कहीं पाइपलाइन बिछाने का काम किया गया, तो कहीं जलमीनार का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया।
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बताया जा रहा है कि कुछ गांवों में पिछले दो वर्षों से जलकुंभ और पानी की टंकियों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। ठेकेदारों द्वारा पाइपलाइन बिछा दी गई, लेकिन मुख्य जल टंकी का निर्माण पूरा नहीं होने से पूरी योजना ठप पड़ी हुई है। परिणामस्वरूप ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
महिलाओं पर बढ़ा बोझ
पेयजल संकट का सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ रहा है। गांवों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण महिलाओं को गांव के बाहर के जलस्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। सुबह और शाम पानी की व्यवस्था में ही उनका अधिकांश समय व्यतीत हो रहा है। इससे घरेलू कार्यों के साथ-साथ बच्चों की देखभाल और अन्य जिम्मेदारियों पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
प्रशासन से समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर पेयजल संकट का स्थायी समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि खराब पड़े बोरवेलों की मरम्मत कराई जाए, अधूरी पड़ी जलकुंभ व जलमीनार परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए तथा हर घर नल योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में जलसंकट और गंभीर हो सकता है, जिससे हजारों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
