गोंदिया के बिरसीफाटा बस स्टॉप बदलने से यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें, सुविधाओं का अभाव
बिरसीफाटा में हालिया बस‑स्टॉप बदलाव के कारण यात्रियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है; प्रतीक्षालयों पर पानी, बैठने व प्रकाश व्यवस्था न होने से सुरक्षा व सुविधा दोनों प्रभावित।
- Written By: केतकी मोडक
बिरसीफाटा बस‑स्टॉप (सोर्स - फोटो नवभारत)
Birsi Phata Bus Stop Shift: गोंदिया जिले के तिरोड़ा तहसील के बिरसीफाटा के मुख्य चौराहे पर वर्षों से रुकने वाली महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एसटी) की बसों के स्टॉप में पिछले 8-10 दिनों से किए गए बदलाव के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पर्याप्त व्यवस्था और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना ही बस स्टॉप बदल दिए जाने से रोजाना सफर करने वाले छात्रों, नौकरीपेशा कर्मचारियों, बुजुर्गों और महिला यात्रियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
जानकारी के अनुसार, पहले सभी एसटी बसें बिरसी के मुख्य चौराहे पर रुकती थीं, जिससे यात्रियों को बस पकड़ने में काफी सुविधा होती थी। लेकिन नए बदलाव के बाद अब तुमसर की ओर जाने वाली बसें मुख्य चौराहे से लगभग आधा किलोमीटर दूर, जबकि तिरोड़ा-गोंदिया की ओर जाने वाली बसें करीब 200 मीटर दूर रोकी जा रही हैं।
उल्लेखनीय है कि बिरसीफाटा से प्रतिदिन नागपुर, भंडारा, तुमसर, साकोली, करड़ी, तिरोड़ा, गोंदिया सहित अन्य स्थानों के लिए बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। इसके अलावा विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राएं भी रोजाना इसी मार्ग से यात्रा करते हैं। बस स्टॉप बदलने के कारण अब यात्रियों को भारी सामान के साथ लंबी दूरी पैदल चलनी पड़ रही है।
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सबसे गंभीर समस्या यह है कि बिरसी से तिरोड़ा तहसील की ओर जाने के लिए बनाए गए नए प्रतीक्षालय से बस पकड़ने के लिए यात्रियों को व्यस्त सड़क के बीच बने डिवाइडर को लांघकर पार करना पड़ता है, जिससे हर समय किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसके साथ ही, इस नए प्रतीक्षालय के पास पीने के पानी, बैठने की समुचित व्यवस्था, शेड, प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) तथा अन्य आवश्यक जनसुविधाओं का भी पूरी तरह अभाव है।
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिक राघवलू नेरेल्ला ने कहा है कि “बस स्टॉप बदलने से यात्रियों को हो रही इस भारी असुविधा के बावजूद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की भूमिका उदासीन बनी हुई है। रोजाना सैकड़ों यात्री, छात्र, महिलाएं और बुजुर्ग इस भीषण समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं उठाया है। हमारी मांग है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि परिवहन विभाग और प्रशासन से तत्काल चर्चा कर बस स्टॉप की व्यवस्था में सुधार कराएं, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।”
अब दूर तक जाना पड़ रहा पैदल
पूर्व पंचायत समिति सदस्य शंकर बिझाडे ने कहा है कि “पिछले कई वर्षों से सभी बसें मुख्य चौराहे पर ही रुकती थीं, जिससे यात्रियों को सहूलियत थी। लेकिन प्रशासन द्वारा अचानक बस स्टॉप हटा दिए जाने से प्रतिदिन आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। पहले मुख्य चौक पर ही आसानी से बस मिल जाती थी, लेकिन अब काफी दूर तक पैदल जाना पड़ता है। इस अव्यवस्था के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।”
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बुनियादी सुविधाओं के अभाव से बढ़ा हादसों का खतरा
स्थानीय नागरिकों और छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने यात्रियों की राय लिए बिना और बिना किसी पूर्व नियोजन के बस स्टॉप को स्थानांतरित कर दिया। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ धूप और बारिश के मौसम में दूर तक पैदल चलना अत्यंत कष्टदायक हो गया है। स्कूली छात्रों को हर सुबह बस पकड़ने के लिए जान जोखिम में डालकर हाईवे के डिवाइडर को पार करना पड़ता है। नागरिकों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन को स्टॉप बदलने से पहले वहां पीने के पानी, बैठक व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए थे। यदि इस अव्यवस्था को जल्द दूर नहीं किया गया, तो तीव्र आंदोलन किया जाएगा।
