किसानों के 239 करोड़ रुपये फंसे, सरकार पर आर्थिक संकट में डालने का आरोप

Gondia News: गोंदिया जिले के 27,522 किसानों को रबी सीजन में बेचे गए धान का 239 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान अब तक नहीं मिला है, जिससे खरीफ की बुआई प्रभावित हो रही है।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Gondia News In Hindi: गोंदिया जिले के 27,522 किसान पिछले दो महीनों से अपने ही बेचे गए धान के पैसों के लिए सरकारी कार्यालयों और बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। रबी सीजन में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले इन किसानों का सरकार पर 239 करोड़ 84 लाख रुपये से अधिक का बकाया है। इस देरी के कारण किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जिससे खरीफ सीजन की नई फसल की बुआई से जुड़े आवश्यक खर्च भी रुक गए हैं।

विपणन विभाग के सूत्रों के अनुसार, रबी सीजन में जिले के 182 धान केंद्रों से 49,772 किसानों से लगभग 20.74 लाख क्विंटल धान खरीदा गया था, जिसकी कुल कीमत 477 करोड़ रुपये से अधिक थी। इसमें से सरकार ने केवल 237 करोड़ रुपये ही जारी किए हैं, जिसमें से 2.28 करोड़ रुपये 22,250 किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर किए गए। हालांकि, 27,522 किसानों का 239 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान अभी भी लंबित है।

सरकार पर आरोप और राजनीतिक दबाव

यह स्थिति किसानों के बीच सरकार के प्रति गहरी नाराजगी पैदा कर रही है। किसानों का आरोप है कि सरकार की उदासीनता के कारण वे आर्थिक संकट में फँस गए हैं। खरीफ फसल की बुआई के लिए उन्हें बीज, खाद, कीटनाशक और डीजल खरीदने की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन पैसे न होने के कारण उनके सामने साहूकारों से कर्ज लेने की मजबूरी आ गई है। इस पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ उन्हें और भी मुश्किल में डाल रहा है।

किसानों की यह दुर्दशा एक राजनीतिक मुद्दा बन गई है, जिसमें विपक्षी दल सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं। सरकार की ओर से जिला मार्केटिंग फेडरेशन को अभी तक बकाया राशि का फंड जारी नहीं किया गया है, जिसके चलते किसान अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। यह स्थिति न केवल कृषि अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और परिवार के अन्य जरूरी खर्चों को भी बाधित कर रही है।

किसानों का कहना है कि वे बैंकों और धान खरीद केंद्रों के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर समय पर पैसा नहीं मिला तो खरीफ की फसल भी प्रभावित होगी।

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