संशोधन समाज के लिए उपयोगी होना चाहिए: प्राचार्य डॉ. राजाभाऊ मुनघाटे
Gadchiroli College Research Program:गड़चिरोली के गोविंदराव मुनघाटे कला एवं विज्ञान महाविद्यालय में आयोजित किया गया।
Gadchiroli News: संशोधन समाज लिए उपयोगी होना चाहिए प्राचार्य डा. मुनघाटे का कथन कुरखेड़ा त. सं. आधुनिक युग में सूचना तकनीकी ज्ञान का विभिन्न प्रचार माध्यम द्वारा व डिजिटल साधनों द्वारा ज्ञान का स्त्रोत सर्वत्र उपलब्ध है. लेकिन कोई भी संशोधन मन से करना जरूरी है. संशोधन से आत्मिक समाधान मिलता है. अपना संशोधन का उपयोग समाज को होना जरूरी है. ऐसा प्रतिपादन प्राचार्य राजाभाऊ मुनघाटे ने किया.
दंडकारण्य शैक्षणिक व सांस्कृतिक विकास संशोधन संस्था गड़चिरोली द्वारा संचालित स्थानिय गोविंदराव मुनघाटे कला व विज्ञान महाविद्यालय के संशोधन केंद्र द्वारा आचार्य पदवी के लिए पंजीयन करने वाले संशोधक छात्रों का छह माही पेशकश रिपोर्ट हाल ही में संपन्न हुआ. इस सत्र में वह अध्यक्ष के रूप में बोल रहे थे.
प्राचार्य डा. मुनघाटे ने आगे कहा कि अपना संशोधन रिपोर्ट केवल ग्रंथालय तक सीमित न रहते हुए इस संशोधन से समाज, देश को लाभ होना चाहिए. कोई भी संशोधन समाज उपयोगी हों और वह अपने हाथों हो यह अभिलाषा बरतकर किए गए संशोधन की रिपोर्ट रूप से प्रकाशित करने का आह्वान उन्होंने किया. साथ ही सभी आचार्य पदवी के लिए पंजीयन करने वाले संशोधकों का उन्होंने अभिनंदन किया.
सम्बंधित ख़बरें
गड़चिरोली में नकली नोट रैकेट का पर्दाफाश, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में खुला फर्जी नोटों का खेल, अब जांच तेज
5 करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा घिरा! सहयोगी महिला नक्सली गिरफ्तार, कमांडरों में मचा हड़कंप
मुख्यमंत्री फडणवीस ने छोड़ी VIP सवारी, आम यात्रियों के साथ इंडिगो फ्लाइट में किया सफर; सादगी देख सब हैरान
गड़चिरोली में 68 लाख का गांजा जब्त, खेत में धान की जगह हो रही थी गांजे की खेती
इस समय विषय विशेषज्ञ के रूप में आरमोरी के महात्मा गांधी महाविद्यालय के मराठी विभाग के डा. विजय रैवतकर, समाजशास्त्र विभाग प्रमुख डा. गजेंद्र कढव, उपप्राचार्य पी. एस. खोपे, संशोधन केंद्र के प्रमुख प्रा. डा. रवींद्र विखार आदि उपस्थित थे. मराठी व समाजशास्त्र विषय के आचार्य पदवी के लिए महाविद्यालय के संशोधन केंद्र पर 16 छात्रों ने पंजीयन किया है. कार्यक्रम का संचालन प्रा. डा. रवींद्र विखार ने किया था. आभार प्रा. हेमलता उराडे ने माना. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रा. डा. भास्कर तुपटे, टोकाश कोल्हे, लोकेश राऊत आदि ने परिश्रम किया.
