धान खरीदी: ऑनलाइन पंजीयन की मियाद 31 दिसंबर तक बढ़ी, किसानों के पास आखिरी मौका

गडचिरोली के धान उत्पादक किसानों के लिए जरूरी खबर! समर्थन मूल्य पर धान बिक्री हेतु ऑनलाइन पंजीयन की तिथि 31 दिसंबर तक बढ़ी। तकनीकी दिक्कतों के बीच जल्द पूरा करें रजिस्ट्रेशन। पूरी जानकारी यहां।
Gadchiroli paddy registration date extension
धान खरीदी केंद्र (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Gadchiroli Paddy Registration Date Extension: महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले में समर्थन मूल्य (MSP) खरीदी योजना के तहत खरीफ सत्र 2025-26 के लिए धान की बिक्री करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। शासन ने धान पंजीयन की अंतिम तिथि, जो पहले 15 दिसंबर निर्धारित थी, उसे बढ़ाकर अब 31 दिसंबर 2025 कर दिया है। जिला पणन अधिकारी कार्यालय ने किसानों से अपील की है कि वे इस बढ़ी हुई अवधि का लाभ उठाएं और अपने नजदीकी केंद्रों पर जाकर पंजीकरण सुनिश्चित करें।

पणन फेडरेशन का आधिकारिक आह्वान

'द महाराष्ट्र स्टेट को-ऑप. मार्केटिंग फेडरेशन मर्यादित' और जिला पणन अधिकारी कार्यालय, गडचिरोली के अंतर्गत आने वाले गैर-आदिवासी (बिगर आदिवासी) क्षेत्र के किसानों को सूचित किया गया है कि वे धान बिक्री के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर अपना नाम दर्ज कराएं। गड़चिरोली जिले के धान खरीदी केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों के पंजीकरण में सहयोग करें। शासन का उद्देश्य यह है कि कोई भी पात्र किसान समर्थन मूल्य के लाभ से वंचित न रहे, विशेषकर वे जिनकी फसल की कटाई में देरी हुई है।

सर्वर डाउन और तकनीकी खामियों से किसान परेशान

एक ओर सरकार ने पंजीयन की अवधि बढ़ा दी है, लेकिन दूसरी ओर जमीनी हकीकत काफी चुनौतीपूर्ण है। जिले के कई केंद्रों से खबरें आ रही हैं कि ऑनलाइन पोर्टल का सर्वर डाउन होने और बार-बार तकनीकी खराबी आने के कारण किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सर्वर की धीमी गति और इंटरनेट की समस्याओं के चलते बड़ी संख्या में किसान अब भी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं।

जल्द पंजीकरण कराने की सलाह

तकनीकी बाधाओं और अधूरी जानकारी के कारण कई गांवों के किसान अभी भी पंजीयन प्रक्रिया से वंचित हैं। प्रशासन ने सलाह दी है कि अंतिम दिनों की भीड़ और तकनीकी लोड से बचने के लिए किसान समय रहते अपने दस्तावेजों के साथ केंद्र पर पहुंचें। धान खरीदी केंद्रों के माध्यम से सटीक डेटा फीड करने पर ही किसानों के खातों में भुगतान सुचारू रूप से हो पाएगा। किसानों की मांग है कि तकनीकी खामियों को जल्द सुधारा जाए ताकि वे बिना किसी मानसिक तनाव के अपना धान सरकारी केंद्रों पर बेच सकें।

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