भापड़ा गांव में चार साल से शराबबंदी, प्रवेश द्वार पर बना ‘विजयस्तंभ’
भापड़ा गांव में 2 वर्ष से शराबबंदी, ग्रामीणों का प्रयास रंग लाया। जानें कैसे हुआ बदलाव और इसके दुष्परिणाम।
Gadchiroli News: एटापल्ली तहसील के सोहगांव ग्रापं अंतर्गत आने वाले भापड़ा गांव में पहले बड़े पैमाने पर घरेलू शराब निकाली जा रही थी. ऐसे में गांव में आयोजित एक बैठक में शराब के दुष्परिणाम ध्यान में लेते हुए ग्रामीणों ने सभी की अनुमति से घरेलू शराब के साथ अवैध बिक्री पर भी पाबंदी लगाई. जिले के एटापल्ली तहसील के अतिदुर्गम भापड़ा में निरंतर चार वर्षों से शराब बिक्री पर लगाम कसकर गांव के मुख्य प्रवेशद्वार पर शराबबंदी का विजयस्तंभ उभारा है. एटापल्ली तहसील मुख्यालय से भापड़ा गांव 66 किमी दूरी पर बसा है.
यहां के ग्रामीणों का प्रमुख व्यवसाय खेती है. वहीं कृषि पूरक व्यवसाय के रूप में बकरी पालन, मूर्गी पालन, गोपालन, मच्छली पालन आदि छोटमोटे कृषि पूरक व्यवसाय किए जाते है. ऐसे में गांव में विवाह, उत्सव, त्योहार, पोलवा, पांडुम आदि आदिवासियों के त्योहार पर घर के ही महुआ फूल की शराब निकालकर उपयोग करना परंपरा विगत अनेक वर्षों से चली आ रही थी. जिस पर मुक्तिपथ अभियान द्वारा गांव में जनजागृति की गई. गांव में मुक्तिपथ गांव संगठन की स्थापना की गई.
गांव संगठन के अध्यक्ष के रूप में गांव के पटेल को चयनित किया गया. मुक्तिपथ गांव संगठन अध्यक्ष की उपस्थिति में निरंतर बैठक लेकर एकमत से शराबबंदी का निर्णय लिया गया. दुष्परिणामों के बारे में दी जानकारीशराबबंदी होने से पहले गांव के युवक शराब के नशे में धूत होकर उद्यम मचाया करते थे. इस पर गांव के प्रतिष्ठित नागरिक व सरपंच जग्गु देहारी द्वारा जनजागृति कर शराब पीने के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि शराब पीने से गांव के युवक नौकर भर्ती में विफल होते है.
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गांव में विवाद, मारपीट होने से गांव की बदनामी होने की बात कही. जिसके चलते गांव ने निर्णय लिया कि अगर गांव में कोई घरेलू शराब निकालते हुए पाया गया तो 10 हजार रुपये जुर्माना लिया जाएगा. जिसके चलते भापड़ा गांव में पिछले दो वर्षों से अब तक घरेलू शराब निकालना और अवैध शराब बिक्री करना पूर्णता बंद है.
