वर्धा में कोल्हापुरी बंधारे बदहाल, किसानों की सिंचाई पर संकट
Wardha District: वर्धा जिले में कृषि सिंचाई के लिए बनाए गए कोल्हापुरी बंधारे आज संकट में हैं। बंधारों की खराब स्थिति, गेट चोरी, रखरखाव की कमी और संबंधित विभाग की अनदेखी के कारण ये बांध अब किसानों के लिए निरुपयोगी हो गए हैं।
जिले में 175 कोल्हापुरी बांध बनाए गए थे, लेकिन अब इनमें से कई बांध नष्ट हो चुके हैं। कई स्थानों पर लोहे के गेट चोरी हो गए हैं, जिससे पानी जमा नहीं हो पा रहा और सिंचन की क्षमता घट गई है। इसके परिणामस्वरूप किसानों को ग्रीष्मकाल में सिंचाई की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, अब प्रत्येक वर्ष 4 करोड़ रुपये की निधि उपलब्ध है, लेकिन पुराने बंधारों की दुरुस्ती की प्रक्रिया धीमी है। कई किसानों ने इन बांधों की तत्काल मरम्मत और नए गेट लगाने की मांग की है़। वर्तमान में, नए कोल्हापुरी बांध निर्माण की जगह साठवण बंधारे और वनराई बांधों पर अधिक जोर दिया जा रहा है़।
यदि इन बांधों पर ध्यान दिया जाए, तो किसानों को सिंचन का लाभ मिल सकता है और कृषि उत्पादन बढ़ सकता है़। अन्यथा, कोल्हापुरी बंधारे केवल नाम के रह जाएंगे और सिंचाई की समस्याएं और बढ़ जाएंगी़।
कचरा जलाने से पेड़ पर खतरा
एक ओर सरकार की ओर से पौधारोपण एवं संवर्धन के लिए नप के माध्यम से शहर में विभिन्न उपक्रम चलाकर व्यापक प्रयास किए जा रहे है़, जबकि दूसरी ओर नप के अप्रशिक्षित सफाई कर्मचारियों की लापरवाही के कारण शहर की वन संपदा खतरे में आ गई है़। मार्गों की सफाई कर कचरा पेड़पौधों के नजदीक जलाना बंद करें, ऐसी मांग की जा रही है़। नप के उदासीन रवैये के चलते वृक्ष प्रेमियों में नाराजगी बढ़ रही है़।