‘स्टील हब’ परियोजनाओं के खिलाफ किसानों का मोर्चा, उपजाऊ जमीन बचाने आंदोलन तेज
Gadchiroli Farmers Protest: गड़चिरोली जिले में कृषि भूमि अधिग्रहण और जंगली हाथियों के उत्पात के खिलाफ किसान संघर्ष कृति समिति द्वारा 4 जून से जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना आंदोलन किया जाएगा।
- Written By: केतकी मोडक
गढ़चिरौली के किसान, किसान संघर्ष कृति समिति के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए (सोर्स - सोशल मीडिया)
Farmers Against MIDC Project In Gadchiroli: गड़चिरोली जिले को ‘स्टील हब’ बनाने के नाम पर महायुति-भाजपा सरकार जिले का भारी नुकसान कर रही है। किसानों की उपजाऊ जमीनों के जबरन अधिग्रहण के विरोध में आगामी 4 जून 2026 से जिलाधिकारी कार्यालय, गड़चिरोली के सामने ‘किसान संघर्ष कृति समिति’ की ओर से व्यापक स्तर पर धरना आंदोलन किया जाएगा।
यह महत्वपूर्ण जानकारी समिति के प्रमुख महेंद्र ब्राम्हणवाडे ने एक विशेष पत्र परिषद के माध्यम से मीडिया को दी है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि जिले के स्थानीय किसानों के लगातार तीव्र विरोध के बावजूद एमआईडीसी, हवाई अड्डा तथा अन्य विभिन्न परियोजनाओं के लिए सरकार किसानों से कोई भी सकारात्मक चर्चा किए बिना उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण कर रही है।
जिले के अधिकांश किसान पूरी तरह अल्पभूधारक हैं और उनका पूरा जीवनयापन एकमात्र खेती पर ही निर्भर है, ऐसे में इन उपजाऊ जमीनों का अधिग्रहण करना सीधे तौर पर किसानों को पूरी तरह बर्बाद करने जैसा है।
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14 गांवों के लोगों ने अपनी जमीन देने से किया साफ इंकार
महेंद्र ब्राम्हणवाडे ने आंकड़ों के साथ बताया कि गड़चिरोली तहसील के हीरापुर, गुरुवला, राखी और शिरपूरचक में प्रस्तावित हवाई अड्डे (एयरपोर्ट) के निर्माण का स्थानीय किसानों ने पहले ही तीव्र विरोध किया है। वहीं दूसरी ओर, चामोर्शी तहसील में प्रस्तावित एमआईडीसी के लिए भेंडाला क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 14 गांवों के लोगों ने अपनी उपजाऊ कृषि भूमि देने से पूरी तरह इनकार कर दिया है।
इसके अलावा, चामोर्शी तहसील के ही जयरामपुर क्षेत्र के 13 अन्य गांवों की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर भी शासन ने मनमाने तरीके से आदेश जारी किए हैं। इन किसान विरोधी नीतियों के विरोध में इससे पहले भी प्रभावितों द्वारा सरकारी जीआर की होली जलाने, जिलाधिकारी कार्यालय के सामने मुंडन आंदोलन करने, धरना प्रदर्शन करने तथा कई बार प्रशासनिक ज्ञापन देकर शासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया। लेकिन बेहद खेद की बात है कि किसानों की जायज बात सुनने के लिए कोई भी तैयार नहीं है।
जंगली हाथियों का लगातार उत्पात
भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ, पिछले तीन-चार वर्षों से गड़चिरोली जिले में जंगली हाथियों का आतंक और उत्पात भी बेहद बढ़ गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों के किसानों का पूरा जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हाथियों के स्थायी और त्वरित बंदोबस्त की मांग जिला प्रशासन और वन विभाग से कई बार किए जाने के बावजूद आज तक धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
इन सभी ज्वलंत मांगों को लेकर तथा जिले की उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण को तत्काल रोककर केवल वैकल्पिक व बंजर जमीनों का उपयोग करने की मुख्य मांग को लेकर 4 जून से जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष यह बेमियादी धरना आंदोलन आयोजित किया गया है।
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विभिन्न दलों और संगठनों से शामिल होने की अपील
इस बड़े जन आंदोलन में जिले के तमाम किसान भाइयों, आम नागरिकों, विभिन्न राजनीतिक दलों के सक्रिय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से बहुत बड़ी संख्या में शामिल होने की आत्मीय अपील महेंद्र ब्राम्हणवाडे ने पत्र परिषद के माध्यम से की है।
इस महत्वपूर्ण पत्र परिषद के दौरान प्रमुख रूप से दिवाकर निसार, सतीश विधाते, नेताजी गावतुरे, वसंत राऊत, मिलिंद खोब्रागड़े, प्रशांत कोराम, श्रीनिवास ताटपल्लीवार, राजाराम ठाकरे, देवेंद्र ब्राम्हणवाडे, ढीवरु मेश्राम, प्रशिक बांबोडे, जीवन निकुरे और गिरीधर मेश्राम सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।
