खाट-स्ट्रेचर का सहारा! गड़चिरोली के दुर्गम कोईंदूल गांव में स्वास्थ्यकर्मियों की जांबाजी से टला बड़ा हादसा

Gadchiroli Pregnant Woman: गड़चिरोली के कोईंदूल गांव में सड़क न होने से एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। स्वास्थ्यकर्मियों ने गर्भवती महिला को डेढ़ किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर ले जाकर अस्पताल पहुंचाया।
Relying on a cot-turned-stretcher! A major tragedy was averted in the remote village of Koindool, Gadchiroli, thanks to the heroic efforts of health workers.
गड़चिरोली, गर्भवती महिला,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
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Gadchiroli Pregnant Woman Healthcare Workers: गड़चिरोली जिले की एटापल्ली तहसील के कसनसूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाले कोईदूल गांव में सड़क के अभाव के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर स्थिति एक बार फिर सामने आई है। सोमवार की सुचह गर्भवती माता पुष्पा सुनील परसा (30) को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर स्वास्थ्यकर्मी तत्काल गांव पहुंचे, लेकिन कच्चे रास्ते और बीच में बह रहे नाले के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।

ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों ने मानवता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए महिला को करीब डेढ़ किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया। इसके बाद प्रसूता को कसनसूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उसकी सुरक्षित प्रसूति कराई गई और उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। बाद में बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उसे गड़चिरोली के महिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उस पर उपचार जारी है।

सड़क के अभाव में प्रसूता की जान पर बनी, स्वास्थ्यकर्मियों ने बचाया

स्वास्थ्यकर्मियों की तत्परता से समय पर उपचार मिल सका और मां-बेटी दोनों सुरक्षित हैं। कोईंदूल समेत क्षेत्र के दुर्गम गांवों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति को फिर उजागर कर दिया है। जंगलों से घिरे आदिवासी बहुल इस गांव का बारिश के दिनों में बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग कट जाता है।

सड़क न होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक ले जाने के लिए ग्रामीणों को जान जोखिम में डालनी पड़ती है। स्वास्थ्यकर्मियों की सतर्कता से एक प्रसूता की जान बच गई, लेकिन हर बार ऐसी स्थिति में समय पर मदद मिलना संभव नहीं होगा। यदि भविष्य में किसी गंभीर मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? ऐसा सवाल ग्रामीणों ने उपस्थित किया है।

पांच नालों से घिरे चार गांव, बारिश में टूट जाता है संपर्क

कसनसूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आनेवाले कोईंदूल, रेकनार, गडदापल्ली और गुंमडी गांव घने जंगलों में स्थित आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं। इन गांवों के मार्ग में दो बड़े और तीन छोटे, कुल पांच नाले पड़ते हैं।

बारिश के मौसम में ये सभी नाले उफान पर आ जाते हैं, जिससे इन गांवों का संपर्क कसनसूर और तहसील मुख्यालय से पूरी तरह टूट जाता है। हाल ही में कोईदूल की गर्भवती महिला को स्ट्रेचर पर ले जाने की घटना ने इन गांवों की बदहाल स्थिति को फिर उजागर कर दिया है।

जनप्रतिनिधियों की कब खुलेगी नींद ?

ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से सवाल किया है कि, जब चार गांव हर वर्ष बारिश में दुनिया से कट जाते हैं और गर्भवती महिलाओं तक को स्ट्रेचर पर ले जाना पड़ता है, तब भी स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि, कोईदूल, रेकनार, गडदापल्ली और गुंमडी सहित सभी सड़कविहीन गांवों में शीघ्र पक्की सड़कें, पुल-पुलियों और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी व्यक्ति की जान सड़क के अभाव में खतरे में न पड़े।

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