745 करोड़ की सीवरेज योजना की सुस्त रफ्तार: संभाजीनगर में खोदी सड़कें बनीं जी का जंजाल, कीचड़ से नागरिक बेहाल!

Sambhajinagar Sewerage Project Smart City: संभाजीनगर की 745 करोड़ रुपये की भूमिगत सीवरेज परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ गई है। सड़क खुदाई के बाद मरम्मत में देरी से नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
Sluggish pace of ₹745-crore sewerage project: Dug-up roads in Sambhajinagar become a nightmare; citizens in distress due to mud!
छत्रपति संभाजीनगर सीवरेज,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Sambhajinagar Sewerage Project: छत्रपति संभाजीनगर शहर को आधुनिक भूमिगत सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने के लिए शुरू की गई 745 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ गई है। चार चरणों में चल रही इस योजना के दो प्रकल्प अंतिम दौर में पहुंच चुके हैं, लेकिन शहर के मध्य और पूर्व क्षेत्र में काम अब भी आधा भी पूरा नहीं हो सका है।

दूसरी ओर, पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों की समय पर मरम्मत नहीं होने से नागरिकों को रोजाना धूल, कीचड़, गड्डों और यातायात अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।

बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो गई है। केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना और राज्य सरकार के सुवर्ण जयंती नगरोत्थान अभियान के अंतर्गत शहर में भूमिगत सीवरेज व्यवस्था विकसित की जा रही है।

कई क्षेत्रों में मुख्य सीवरेज पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है। अब पंपिंग स्टेशन, मुख्य नालों से नेटवर्क जोड़ने और घर-घर सीवरेज कनेक्शन देने का कार्य चल रहा है। पश्चिम क्षेत्र के एमजीएम गोल्फ क्लब और तिसगांव तथा पूर्व क्षेत्र के नारेगांव में सीवेज शोधन संयंत्रों का निर्माण भी प्रगति पर है।

तकनीकी बाधाओं के कारण कई क्षेत्रों में काम प्रभावित

परियोजना के तहत शहर के अनेक हिस्सों में सड़कें खोद दी गई, लेकिन अधिकांश स्थानों पर उनका पुनर्निर्माण समय पर नहीं किया गया। इससे वाहन चालकों, पैदल यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। वर्षा के कारण कई स्थानों पर सड़कें कीचड़ और गड्ढों में बदल गई है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।

नागरिकों ने अधूरे कार्यों के साथ-साथ सड़कों की तत्काल मरम्मत की मांग की है। ड्रेनेज विभाग के कार्यकारी अभियंता अनिल तनपुरे ने बताया कि सभी लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश संबंधित ठेकेदारों को दिए गए हैं। घनी आबादी, यातायात और अन्य तकनीकी बाधाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में काम प्रभावित हुआ है, फिर भी परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए लगातार निगरानी और समीक्षा की जा रही है।

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