गड़चिरोली जिला परिषद (सौजन्य-नवभारत)
Graduate Pay Scale Dispute: सरकार के परिपत्र के अनुसार जिला परिषद के शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को पदोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए करीब 200 शिक्षकों की सूची तैयार की गई थी, लेकिन वास्तविक रूप से केवल 6 शिक्षकों को ही पदोन्नति देते हुए ग्रेजुएट वेतनश्रेणी लागू की गई। इससे पूरी प्रक्रिया विवादों में घिर गई है और पात्र शिक्षकों में नाराजगी व आक्रोश देखने को मिल रहा है।
शिक्षकों का आरोप है कि पदोन्नति के लिए पात्र शिक्षकों की सूची शिक्षा विभाग द्वारा नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित नहीं की गई। साथ ही इस सूची पर किसी प्रकार की आपत्तियां भी आमंत्रित नहीं की गईं और न ही उनका निराकरण किया गया। इसी कारण पूरी पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
सरकार के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों में से एक तिहाई (1/3) शिक्षकों को वरिष्ठता के आधार पर ग्रेजुएट वेतनश्रेणी दी जानी चाहिए। विज्ञान विषय समूह में स्नातक शिक्षकों की कमी को देखते हुए 12 वीं विज्ञान उत्तीर्ण शिक्षकों को विज्ञान विषय समूह के स्नातक शिक्षकों के स्थान पर पदोन्नति दी गई है। हालांकि वास्तविक स्नातक डिग्री प्राप्त होने तक उन्हें ग्रेजुएट वेतनश्रेणी देने का प्रावधान नहीं है।
उक्त नियमों के अनुसार एक तिहाई सीमा से कम शिक्षकों के पास विज्ञान विषय की स्नातक डिग्री होने के कारण पहले 57 शिक्षकों को यह वेतनश्रेणी लागू की गई थी। इसके बाद कुछ शिक्षकों ने बी.एससी. की योग्यता प्राप्त करने के बावजूद वेतनश्रेणी लागू नहीं होने की शिकायत करते हुए सरकार को आवेदन दिया था।
प्राप्त निवेदन, उच्च न्यायालय के विभिन्न मामलों में दिए गए निर्णय तथा वेतनश्रेणी लागू करने से संबंधित नियमों पर विचार करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि जिन शिक्षकों ने विज्ञान विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है और उस समय 1/3 सीमा से कम शिक्षक पात्र थे, वे ग्रेजुएट वेतनश्रेणी के लिए पात्र हैं।
इस आदेश के तहत विनोद पापचे गंपावार, निलेश मनोहर विश्रोजवार, प्रमोद प्रभाकर रोहणकर, आशीष अशोक येल्लेवार, रामदास बापू कोंडागोर्ला तथा जितेंद्र वासुदेव मुसहीबार इन छह शिक्षकों को ग्रेजुएट वेतनश्रेणी लागू की गई है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन शिक्षकों को ग्रेजुएट वेतनश्रेणी मिलने से उनके सेवा संवर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होगा और न ही उनका अलग संवर्ग बनाया जाएगा।
उन्हें कक्षा 6 से 8 तक के वर्गों में निर्धारित विषयों का अध्यापन करना होगा। इसके अलावा वरिष्ठता के आधार पर जो स्नातक प्राथमिक शिक्षक प्राथमिक विद्यालय के मुख्याध्यापक पद के लिए पात्र होंगे, उन्हें मुख्याध्यापक का कार्यभार भी संभालना होगा, लेकिन इसके लिए किसी प्रकार का अतिरिक्त वेतन नहीं दिया जाएगा। साथ ही ये शिक्षक संबंधित स्कूल के मुख्याध्यापक के अधीन ही कार्य करेंगे।
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आदेश में यह भी कहा गया है कि ग्रेजुएट वेतनश्रेणी प्राप्त करने वाले शिक्षकों को विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। इसके लिए संबंधित शिक्षकों से लिखित हमीपत्र भी लिया जाएगा। इधर, जिला परिषद प्रशासन द्वारा केवल छह शिक्षकों को पदोन्नति देने के आदेश जारी किए जाने से अन्य पात्र शिक्षकों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। कई शिक्षकों ने इस प्रक्रिया को नियमों के विरुद्ध बताते हुए पूरे मामले की जांच कराने और सभी पात्र शिक्षकों को न्याय देने की मांग की है।
गड़चिरोली शिक्षणाधिकारी बाबासाहब पवार ने बताया सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय तथा शिक्षा परिषद के नियमों के अनुसार ही पदोन्नति की यह प्रक्रिया लागू की गई है। इसमें किसी प्रकार की कोई गलती या नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है। यह एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे विधिवत पूरा किया गया।