गड़चिरोली में 100 करोड़ का 'गटर घोटाला'? 5 साल बीते, आधे शहर में पाइपलाइन तक नहीं पहुंची! ठेकेदार की खुली पोल

Gadchiroli Municipal Council Sewerage Scheme:गड़चिरोली में 100 करोड़ की भूमिगत गटर योजना बनी सफेद हाथी! 5 साल बाद भी 70% काम अधूरा। ठेकेदार ने किया पूरा होने का दावा, नगर पालिका के सर्वे में खुली पोल।
100 Crore Underground Drainage Scheme in Gadchiroli remains incomplete after 5 years. Only 30-40% work done, but contractor claims completion.
भूमिगत गटर योजना (सौजन्य-नवभारत)
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100 Crore Gutter Scam Gadchiroli: गड़चिरोली शहर की स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने और गटर के गंदे पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के उद्देश्य से गड़चिरोली नगर परिषद द्वारा लगभग 5 वर्ष पहले 100 करोड़ रुपये की लागत से भूमिगत गटर योजना शुरू की गई थी। इस योजना से उम्मीद थी कि शहर के नागरिकों को गंदे पानी, खुले नालों और अस्वच्छ वातावरण से राहत मिलेगी।

मगर हकीकत यह है कि 5 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह महत्वाकांक्षी योजना अधूरी पड़ी है और इसका लाभ शहरवासियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच सका है। जानकारी के अनुसार, भूमिगत गटर योजना के तहत शहर में पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया गया, लेकिन अब तक बड़ी संख्या में नागरिकों के घरों के शौचालय और सांडपानी की लाइनें मुख्य भूमिगत गटर नेटवर्क से जोड़ी ही नहीं गई हैं।

यही नहीं, शहर में इस योजना का केवल 30 से 40 प्रतिशत काम ही पूरा होने की बात सामने आ रही है। इससे करोड़ों रुपये की इस परियोजना की गुणवत्ता, प्रगति और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब संबंधित ठेकेदार ने नगर पालिका प्रशासन के सामने यह दावा किया कि भूमिगत गटर योजना का काम पूरा हो चुका है और उसके बकाया बिल की राशि का भुगतान किया जाए।

ठेकेदार की इस मांग के बाद नगर पालिका प्रशासन ने वास्तविक स्थिति जानने के लिए अपने कर्मचारियों के माध्यम से शहर में भूमिगत गटर जोड़णी का सर्वेक्षण शुरू किया। सर्वेक्षण के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।

गंदे पानी की निकासी की समस्या जस की तस

नागरिकों का कहना है कि 100 करोड़ रुपये जैसी भारी-भरकम राशि खर्च होने के बावजूद अगर घरों तक सीवर सुविधा नहीं पहुंची, तो यह बेहद गंभीर मामला है। लोगों के अनुसार, आज भी शहर में गंदे पानी की निकासी की समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है और कई इलाकों में नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरे मामले ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • 5 साल बाद भी घरों तक नहीं पहुंची सीवर सुविधा
  • शहर में केवल 30 से 40 फीसदी कार्य पूरा
  • नगर पालिका प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल

उठ रही जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों और जागरूक लोगों की ओर से अब इस पूरी योजना की निष्पक्ष और तकनीकी जांच की मांग उठ रही है। उनका कहना है कि योजना के तहत अब तक हुए काम, वास्तविक जोड़णी, खर्च की गई राशि और लंबित कार्यों का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही, यदि किसी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या गलत जानकारी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

नप प्रशासन की भूमिका पर सबका ध्यान

फिलहाल गड़चिरोली नगर पालिका की 100 करोड़ रुपये की भूमिगत गटर योजना सवालों के घेरे में है। एक ओर ठेकेदार कार्य पूर्ण होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पालिका के सर्वेक्षण में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ऐसे में अब शहरवासियों की नजर इस बात पर टिकी है कि नगर पालिका प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और इस महत्वाकांक्षी योजना का वास्तविक लाभ जनता तक कब पहुंच पाता है।

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