Jhinganur village drinking water problem (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gadchiroli Water Crisis: गड़चिरोली जिले की आखिरी छोर पर बसी सिरोंचा तहसील मुख्यालय से करीब 70 किमी दूरी पर बसे झिंगानुर गांव में इन दिनों भीषण जलसंकट की स्थिति निर्माण हो गई है। जिसके कारण ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए करीब डेढ़ किमी तक का सफर तय करने की नौबत आ पड़ी है। प्रशासन द्वारा इस गांव में 50 से 60 बोरवेल का खुदाईकरण करने के बाद भी परिसर में पानी की समस्या कायम है। जिसके कारण प्रशासन की उपाययोजना केवल शो-पीस बनने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा है कि झिंगानुर गांव से 10 किमी दूरी पर इंद्रावती नदी बहती है। बावजूद इसके गांव के नागरिकों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। अप्रैल माह की शुरुआत होते ही झिंगानुर गांव के कुएं और हैंडपंप पूरी तरह सूख गए है। जिसके कारण ग्रामीणों को करीब डेढ़ किमी की दूरी तय कर पीने का पानी लाने की नौबत आ गई है। विशेषतः प्रति वर्ष ग्रीष्मकाल के दिनों में यही स्थिति निर्माण होकर ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन दूसरी ओर प्रशासन द्वारा स्थायी उपाययोजना नहीं किए जाने के कारण वर्तमान स्थिति में ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भटकने की नौबत आ पड़ी है।
वर्तमान स्थिति में लिंगानुर गांव में पानी की समस्या काफी गंभीर हो गई है। कुएं और हैंडपंप का जलस्तर घटने के कारण गांव की महिला और नागरिक गांव समीपस्थ नाले से पानी ला रहे है। लेकिन नाले का पानी दूषित होने के कारण नागरिकों के स्वास्थ्य पर विपरित परिणाम होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषतः इतनी गंभीर स्थिति होने के बाद भी प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिए जाने से नागरिकों में तीव्र नाराजगी है। विशेषतः गांव के नागरिक साइकिल और बैलगाड़ी से पानी लाते हुए दिखाई दे रहे है। वहीं महिलाएं अपने सिर पर पानी का मटका लेकर लंबी दूरी तय करते हुए दिखाई दे रही है।
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सिरोंचा तहसील भाजपा उपाध्यक्ष सुरेश अनकरी ने कहा कि प्रति वर्ष ग्रीष्मकाल के दिनों में परिसर के चार गांवों में जलसंकट की स्थिति निर्माण होती है। जलसंकट की समस्या का निराकरण करने के लिए प्रशासन द्वारा उपाययोजना की गई, लेकिन यह उपाययोजना केवल नामशेष बनकर रह गई है।
विशेषतः संबंधित गांवों में निर्माण होने वाली जलसंकट की समस्या का निराकरण करने संदर्भ में अनेक बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यानाकर्षण कराया गया, बावजूद इसके समस्या जस की तस बनी हुई है। बैलगाड़ी और साइकिल का उपयोग वर्तमान स्थिति में ग्रीष्मकाल के दिन शुरू होकर गांव में जलसंकट निर्माण होने के कारण झिंगानूर वासियों को पीने पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।