गड़चिरोली: 15 लाख का जलशुद्धिकरण केंद्र बना 'शो-पीस', दूषित पानी से गांव में बढ़ी किडनी की बीमारी, मौत का खौफ

Gadchiroli News: गड़चिरोली के पुसुकपल्ली में लाखों की लागत से बना वाटर प्यूरीफिकेशन प्लांट डेढ़ महीने में ही बंद हो गया। दूषित पानी पीने से ग्रामीण किडनी की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
Gadchiroli Water Purification Plant Issues
गड़चिरोली के पुसुकपल्ली के ग्रामीण (फोटो नवभारत)
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Gadchiroli Water Purification Plant Issues: गड़चिरोली जिले की अहेरी तहसील के अंतर्गत आने वाले पुसुकपल्ली गांव में स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और किडनी जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही ने इस पूरी योजना को 'शो-पीस' बना दिया है।

ग्रामीणों को शुध्द पीने का पानी मिले, किडनी जैसी गंभीर बीमारी से बचाव हो, इस उद्देश्य से गड़चिरोली जिले की अहेरी तहसील के नागेपल्ली ग्रापं अंतर्गत आने वाले पुसुकपल्ली गांव में जलशुद्धिकरण केंद्र निर्माण किया गया था। लेकिन वर्तमान स्थिति में उक्त जलशुध्दिकरण केंद्र शो-पीस बनकर रह गया है। जिसका नतीजा गांव के लोगों को शुध्द पीने के पानी के लिए 8 से 10 किमी दूरी अहेरी तहसील मुख्यालय में जाना पड़ रहा है। जिससे नागरिकों को स्वास्थ्य पर विपरित परिणाम होने की संभावना जताई जा रही है।

दूषित व क्षारयुक्त पानी की समस्या बरकरार

ग्रामीणों ने बताया कि 15वें वित्त आयोग की निधि से लाखों रुपये खर्च कर सितंबर 2022 में जलशुद्धिकरण केंद्र निर्माण किया गया था। इस जलशुध्दिकरण केंद्र के चलते गांव के नागरिकों को दूषित व क्षारयुक्त पानी का प्रश्न हल होगा, ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन डेढ़ माह की अवधि में उक्त जलशुद्धिकरण केंद्र बंद हो गया। इस केंद्र की सभी यंत्र सामग्री धुल खाते पड़ी हैं। देखभाल नहीं होने के कारण संपूर्ण प्रकल्प निष्क्रिय हो गया है। जिससे वर्तमान स्थिति में क्षारयुक्त और दूषित पानी के लिए गांव में किडनी संबंधी बीमारी का प्रमाण बढ़ने की बात ग्रामीणों ने कही है। अनेकों को उपचार के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है तो कुछ लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। वर्तमान स्थिति में गांव में कुछ मरीजों पर उपचार शुरू है। लेकिन इस ओर प्रशासन द्वारा अनदेखी किए जाने के कारण अब ग्रामीण आक्रमक रवैया अपनाते हुए आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

ग्रापं प्रशासन की अनदेखी कायम

ग्राम पंचायत सदस्य राकेश कुलमेथे ने कहा कि गांव में निर्माण हुई किडनी संबंधी बीमारी को लेकर ग्रापं प्रशासन को अनेक बार ज्ञापन सौंपने के बाद गांव में 15वें वित्तीय आयोग की निधि से करीब 14 से 15 लाख रुपयों की निधि खर्च कर जल शुद्धिकरण केंद्र निर्माण किया गया। लेकिन डेढ़ माह की अवधि में ही उक्त केंद्र बंद पड़ गया। इस संदर्भ में अनेक बार ग्रापं का ध्यानाकर्षण कराया गया। बावजूद इसके ग्रापं प्रशासन की अनदेखी कायम है।

अन्यथा ग्रामीण करेंगे आंदोलन

पुसुकपल्ली के ग्रामीण राकेश कोसरे ने बताया कि नागेपल्ली ग्रापं अंतर्गत आने वाले पुसुकपल्ली गांव में दूषित और क्षारयुक्त पानी के लिए किडनी ग्रस्त मरीजों की मृत्यु हुई है। वहीं कुछ मरीजों पर उपचार शुरू है। नागरिकों को शुध्द पीने के पानी के लिए अहेरी तहसील मुख्यालय में जाने की नौबत आ पड़ी है। जिससे ग्रापं प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान देकर तत्काल उपाययोजना करें, अन्यथा आंदोलन किया जाएगा।

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