पवनी की जल योजना पर सवाल: शुद्धीकरण केंद्र के पानी में मृत छिपकली-कीड़े मिले, सांसद ने जताई नाराज़गी

Maharashtra News: पवनी में जलशुद्धीकरण केंद्र के निरीक्षण में सांसद ने पाया मृत छिपकली और कीड़े, प्रशासन को सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश।
पवनी की जल योजना पर सवाल: शुद्धीकरण केंद्र के पानी में मृत छिपकली-कीड़े मिले, सांसद ने जताई नाराज़गी
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Bhandara News: पवनी नगर परिषद के अंतर्गत लगभग 28.92 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नई जलापूर्ति योजना के जलशुद्धीकरण केंद्र का 7 मार्च को सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने दौरा कर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जलशुद्धिकरण केंद्र के पानी में मृत अवस्था में छिपकली और कीड़े पाए जाने से हड़कंप मच गया।

इस पर सांसद ने तीव्र नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। सांसद ने कहा कि नागपुर शहर का रासायनिक रूप से प्रदूषित पानी नाग नदी के माध्यम से वैनगंगा नदी में मिल रहा है और उसी पानी का उपयोग इंदिरा सागर गोसे बांध से पवनी शहर को जलापूर्ति के लिए किया जाता है।

उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इस पानी में कैडमियम और सेलेनियम जैसे विषैले रसायन हो सकते हैं, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इस अवसर पर पवनी शहर कांग्रेस के महासचिव सैय्यद तबरेज ने सांसद को एक ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में बताया गया कि नाग नदी से आने वाला रसायन युक्त पानी वैनगंगा नदी में मिल रहा है तथा इंदिरा सागर गोसे बांध के जलस्रोत में बड़े पैमाने पर जलपर्णी फैल चुकी है, जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर ठोस कार्रवाई की जाए।

निरीक्षण के दौरान एक और गंभीर तथ्य सामने आया कि पवनी नगर परिषद के पास पानी में मौजूद रासायनिक तत्वों की जांच के लिए स्वतंत्र प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में केवल टीडीएस जांच के आधार पर ही शहर में जलापूर्ति की जा रही है, जिसे सांसद ने अत्यंत चिंताजनक और जोखिमपूर्ण बताया।

इसके अलावा, नई जलापूर्ति योजना की पाइपलाइन और भूमिगत सीवरेज योजना की पाइपलाइन एक-दूसरे के अत्यंत निकट बिछाई गई है। इससे दबाव बढ़ने पर पाइपलाइन फटने तथा दूषित पानी की गंभीर घटना होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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