

Gadchiroli Hospital Fire Incident: गड़चिरोली जिला मुख्यालय स्थित महिला तथा बाल अस्पताल में शनिवार शाम एक बड़ा हादसा टल गया। अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) में अचानक हुए शॉर्ट सर्किट के कारण बिजली पैनल में आग लग गई, जिससे कुछ देर के लिए पूरे अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। उस समय एनआईसीयू में उपचाराधीन 13 नवजात शिशुओं की जान खतरे में पड़ गई थी।
हालांकि कर्मचारियों की तत्परता और सूझबूझ से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया और सभी नवजातों को सुरक्षित बचा लिया गया। यह घटना शनिवार शाम करीब 4 बजे हुई। एनआईसीयू कक्ष के बिजली पैनल में अचानक शॉर्ट सर्किट होने से चिंगारियां निकलीं और आग लग गई। संयोगवश उसी समय अस्पताल के भूतल पर एक महिला कर्मचारी के सेवानिवृत्ति समारोह का आयोजन चल रहा था, जिसमें अधिकांश कर्मचारी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि जिस मंजिल पर आग लगी, वहां उस समय केवल तीन-चार कर्मचारी ही ड्यूटी पर थे।
घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिलाओं, नवजातों के परिजनों और अन्य मरीजों के बीच दहशत फैल गई। कुछ समय के लिए अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी और भागदौड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। एनआईसीयू में भर्ती बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिजनों की चिंता बढ़ गई। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल दमकल यंत्रणा की सहायता से आग पर काबू पाया और उसे आगे फैलने से रोक दिया। कर्मचारियों की सतर्कता के कारण उपचाराधीन सभी 13 नवजात शिशु सुरक्षित बचा लिए गए और एक बड़ी जनहानि टल गई।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि इतने संवेदनशील विभाग में पर्याप्त कर्मचारियों की मौजूदगी सुनिश्चित होनी चाहिए थी, लेकिन अधिकांश कर्मचारी सेवानिवृत्ति समारोह में व्यस्त थे। उनका कहना है कि यदि आग पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जाता, तो गंभीर हादसा हो सकता था। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों के फायर ऑडिट और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़े प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
महिला व बाल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. माधुरी किलनाके ने कहा कि एनआईसीयू कक्ष में आग लगने की सूचना मिलते ही कर्मचारियों तथा अस्पताल प्रबंधन की टीम ने तुरंत कार्रवाई कर आग पर काबू पा लिया। घटना में सभी नवजात शिशु सुरक्षित है और उनका नियमित उपचार जारी है।