Gadchiroli Naxal Free (फोटो क्रेडिट-X)
Naxal Surrender Record: गढ़चिरौली, जो कभी माओवादियों का अभेद्य किला माना जाता था, आज शांति और विकास की नई इबारत लिख रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 31 मार्च 2026 की डेडलाइन खत्म होने के साथ ही देश के अधिकांश हिस्से नक्सलवाद से मुक्त हो चुके हैं।
अब केवल 6 जिले ही नक्सल प्रभावित बचे हैं, जिनमें महाराष्ट्र का एकमात्र जिला गढ़चिरौली शामिल है, जहाँ अब गिनती के केवल 6 नक्सली सक्रिय रह गए हैं।
ऐतिहासिक क्षति: पिछले दो दशकों में 244 पुलिसकर्मी शहीद और 600 से ज्यादा नागरिक मारे गए।
गढ़चिरौली में नक्सलियों का दबदबा उनके मजबूत मुखबिर तंत्र और घने जंगलों के कारण था। इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने C-60 कमांडो फोर्स को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया। गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के साथ समन्वय बढ़ाकर नक्सलियों की रसद और छिपने के ठिकानों पर प्रहार किया गया। साथ ही, ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ के जरिए स्थानीय आदिवासियों का विश्वास जीता गया, जिससे नक्सलियों को मिलने वाली स्थानीय मदद पूरी तरह बंद हो गई।
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गढ़चिरौली के कायाकल्प में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की व्यक्तिगत रुचि ने बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने खुद इस जिले के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। हिंसा कम होते ही सरकार ने यहाँ सड़कों का जाल बिछाया और दुर्गम इलाकों में बस सेवा शुरू की। ‘आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति’ के तहत मार्च 2026 में 11 सीनियर कैडरों ने सरेंडर किया, जिन पर 68 लाख रुपये का इनाम था। 19 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री ने जिले से नक्सलवाद के आखिरी निशानों (स्मारकों) को मिटाने का ऐतिहासिक ऐलान किया।
एसपी नीलोत्पल के अनुसार, अब बचे हुए 6 नक्सलियों की गतिविधियाँ केवल अबूझमाड़ क्षेत्र तक सीमित हैं। सरकार उन्हें मुख्यधारा में शामिल होने का मौका दे रही है, अन्यथा कड़े सैन्य अभियान की चेतावनी दी गई है। आज गढ़चिरौली में केवल बंदूकें शांत नहीं हुई हैं, बल्कि यहाँ नए उद्योग लग रहे हैं और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है। यह जिला अब ‘उग्रवाद के गढ़’ से ‘विकास के मॉडल’ की ओर मजबूती से कदम बढ़ा चुका है।