गड़चिरोली से ‘लाल आतंक’ का अंत, गृहमंत्री अमित शाह की डेडलाइन खत्म, क्या आज नक्सलमुक्त घोषित होगा जिला?
Gadchiroli Naxal Free: गड़चिरोली में दशकों पुराना नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है। गृहमंत्री की 31 मार्च की डेडलाइन आज समाप्त हो रही है, जिससे जिले के नक्सलमुक्त घोषित होने की संभावना बढ़ गई है।
- Written By: आकाश मसने
गड़चिरोली न्यूज
Maharashtra Naxalism End: विगत 4 दशकों से गड़चिरोली के घने जंगल में नक्सल आंदोलन की ‘लाल दहशत’ अब समाप्ति की कगार पर है। केंद्रीय गृहमंत्री ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त करने की घोषणा की थी। इस डेडलाइन को समाप्त होने में चंद कुछ घंटे शेष है। जिससे गड़चिरोली जिला ‘लाल दहशत’ से मुक्त होने की घोषणा सरकार करेगी क्या? इस ओर जिलावासियों का ध्यान लगा है।
खूनी इतिहास और सुरक्षा बलों का पलटवार
वर्ष 1980 के दशक में गड़चिरोली के घने जंगलों में प्रवेश करने वाले नक्सल आंदोलन ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर क्षेत्र की भोले-भाली जनता पर अपनी ‘लाल दहशत’ फैलाई थी। नक्सलियों द्वारा बीते 4 दशकों से किए गए हिंसाचार के चलते बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। इस अवधि में नक्सलियों ने केवल सुरक्षा दल के जवानों की ही नहीं बेगुनाह नागरिकों की भी जानें लीं। लेकिन विगत कुछ वर्षों से सुरक्षा प्रणाली व पुलिस दल के प्रभावी नक्सल विरोधी अभियान के कारण नक्सलियों पर पुलिस हावी रही।
नक्सलियों के गढ़ में घुसकर नए पुलिस थानों का निर्माण कर बड़े पैमाने पर सुरक्षा की कमी को पूरा किया गया है। की सूचना के बाद सुरक्षा प्रणाली ने सभी गृहमंत्री स्तर पर किए गए नियोजनबद्ध कार्रवाई तथा प्रभावी नक्शल विरोधी अभियान व आत्मसमर्पण योजना के चलते विगत 2 वर्षों में नक्सल आंदोलन का व्यापक नुकसान हुआ है। पुलिस दल के आक्रमक कार्रवाई से नक्सल आंदोलन की कमर टूटी है। मुठभेड़ में कुछ प्रमुख वरिष्ठ नेताओं के साथ अनेक नक्सली मारे गए, वहीं अनेक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण करने के चलते नक्सल आंदोलन का पतन करने में पुलिस दल को सफलता मिली। जिससे जिले में अब जिले में 6 नक्सली बचे है। वह नक्सली आत्मसमर्पण कर विकास के मुख्य प्रवाह में आएं, ऐसा आह्वान पुलिस विभाग ने किया है।
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अब केवल 6 नक्सलियों की तलाश
केंद्रीय गृहमंत्रालय द्वारा दी गई 31 मार्च तक नक्सलवाद के समाप्त करने की डेडलाइन अब कुछ घंटों पर आयी है। ऐसे में बचे 6 नक्सलियों की जिले में हलचल नहीं दिखाई दे रही है। जिससे यह नक्सली कहा गए। ऐसा सवाल निर्माण हो रहा है। बचे नक्सलियों के समक्ष अब आत्मसमर्पण करना या मौत को गले लगाना यह 2 विकल्प उपलब्ध है। गड़चिरोली में सक्रिय होने वाले इन 6 नक्सलियों में 3 महिलाओं का समावेश है। इन 6 में से 5 नक्सली मूलतः छत्तीसगढ़ के निवासी है। वहीं गड़चिरोली जिले के एटापल्ली तहसील के गिलनगुडा गांव का निवासी जयराम गावडे एकमात्र जिले के स्थानीय नक्सली का समावेश है।
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महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर अभियान तेज
गड़चिरोली पुलिस दल के प्रभावी नक्सल विरोधी अभियान के चलते विगत 2 वर्षों में नक्सलियों की कमर टूटी है। जिले से नक्सल आंदोलन लगभग समाप्त हुआ है। इस दौरान 31 मार्च की डेडलाइन के मद्देनजर बचे 6 नक्सली आत्मसमर्पण कर विकास मुख्य प्रवाह में आएं, ऐसा आह्वान पुलिस विभाग ने किया है। वहीं नक्सलियों की खोजबीन में महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर नक्सल विरोधी अभियान तीव्र किया गया है।
