नक्सलवाद का अंत करीब? लोकसभा में आज गूंजेगा अमित शाह का ‘मिशन 2026’, जानें क्या है पूरा प्लान

Naxal-Free India: लोकसभा में आज देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर विशेष चर्चा होगी। गृह मंत्री अमित शाह 31 मार्च 2026 की समयसीमा और अब तक मिली सफलताओं का विस्तृत ब्यौरा देंगे।
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, (सोर्स- संसद टीवी)
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Amit Shah on Naxal-Free India: संसद में आज एक ऐसी चर्चा होने जा रही है, जिसका सीधा असर देश के उन सुदूर इलाकों पर पड़ेगा जो दशकों से लाल आतंक के साए में रहे हैं। 30 मार्च का दिन इतिहास के पन्नों में इसलिए दर्ज होने जा रहा है क्योंकि आज लोकसभा में नक्सलवाद के खात्मे की आखिरी तारीख और उसकी रणनीति पर गहन मंथन होगा।

यह बहस महज उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है जिन्होंने हिंसा के कारण वर्षों तक असुरक्षा का सामना किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि 31 मार्च 2026 तक भारत की धरती से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा।

क्या सच में खत्म हो जाएगा नक्सलवाद?

केंद्र सरकार ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और लोकसभा की आज की कार्यसूची में इस मुद्दे को सबसे ऊपर रखा गया है। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे इस महत्वपूर्ण चर्चा की शुरुआत करेंगे। दरअसल, यह सवाल आज हर भारतीय के मन में है कि क्या वाकई अगले एक साल में वह दिन आएगा जब देश का कोई भी हिस्सा नक्सली हिंसा की चपेट में नहीं होगा? गृह मंत्री अमित शाह ने एक साल पहले ही इस विजन को देश के सामने रखा था, और तब से सुरक्षा बलों ने अपनी कार्रवाइयों की रफ्तार को काफी बढ़ा दिया है। आज सदन के पटल पर सरकार यह स्पष्ट करेगी कि इस कठिन लक्ष्य की ओर हम कितनी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहे हैं।

नियम 193 के तहत होने वाली बड़ी बहस के मायने

संसद में आज होने वाली यह विशेष चर्चा 'नियम 193' के तहत आयोजित की जा रही है, जिसे संसदीय भाषा में अल्पकालिक चर्चा कहा जाता है। इस नियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी औपचारिक प्रस्ताव या मतदान की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सदस्य सीधे जनहित के मुद्दे पर अपनी बात रख सकते हैं और सरकार उस पर आधिकारिक जवाब देती है। टीडीपी सांसद डॉ. बायरेड्डी शबरी और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के नोटिस को स्पीकर ओम बिरला ने इस विषय की गंभीरता को देखते हुए स्वीकार कर लिया है। सरकार सदन में नक्सल विरोधी अभियानों का पूरा खाका पेश करने वाली है, जिसमें न केवल सैन्य मोर्चे की जीत, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के निर्माण का भी विवरण होगा।

हालिया आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी का सच

पिछले एक साल के आंकड़े सरकार के दावों को एक ठोस आधार देते हुए नजर आते हैं। ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे दुर्गम राज्यों में नक्सलियों के बड़े कमांडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर हथियार डाल दिए हैं। उदाहरण के तौर पर, 25 मार्च को ओडिशा में कुख्यात माओवादी नेता सुक्रू ने अपने चार साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया, जिन पर सरकार ने 66 लाख रुपये का इनाम रखा था। उनके पास से AK-47 और इंसास जैसी घातक राइफलें भी बरामद की गई हैं।

इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी वरिष्ठ कमांडर पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ सुरक्षा बलों के सामने सरेंडर किया है। अधिकारियों का दावा है कि अब कई जिलों में नक्सलियों की मौजूदगी दहाई के अंक से भी नीचे सिमट गई है। वर्तमान में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या आठ से घटकर अब सिर्फ सात रह गई है, जो सुरक्षा और पुनर्वास की साझा नीति की सफलता को दर्शाता है।

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