महावितरण के दावों की खुली पोल, मानसून पूर्व तैयारी के बावजूद गांवों में गुल रही बिजली
Power Outage News: गड़चिरोली तहसील में शनिवार रात हुई तेज आंधी और बारिश के कारण दर्जनों गांवों की बिजली आपूर्ति रातभर ठप रही, जिससे महावितरण के मानसून पूर्व मरम्मत के दावों की पोल खुल गई है।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सार्स - सोशल मीडिया)
Mahavitaran Service Failure Report: मानसून पूर्व विद्युत लाइनों की समय पर मरम्मत करने, ट्रांसफार्मरों के उचित रखरखाव तथा बिजली के तारों को छूने वाली पेड़ों की शाखाओं की छंटाई करने के ऊंचे-ऊंचे दावे करने वाले महावितरण विभाग की पहली ही आंधी-बारिश ने पूरी तरह से पोल खोलकर रख दी है। शनिवार की रात हुई तेज हवा और बारिश के कारण गड़चिरोली तहसील के दर्जनभर से अधिक गांवों की बिजली पूरी तरह गुल हो गई, जिसके चलते ग्रामीण अंचल के नागरिकों को पूरी रात घने अंधेरे में गुजारनी पड़ी। इस गंभीर घटना के बाद से ही महावितरण की कार्यप्रणाली और उसकी तैयारियों पर तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात गड़चिरोली तहसील के कई क्षेत्रों में तेज हवा के साथ बारिश हुई थी। पानी की फुहारें शुरू होते ही गड़चिरोली शहर समेत तमाम ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह से बाधित हो गई। स्थानीय नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि पिछले कुछ समय से मामूली हवा चलने या मौसम में आंशिक बदलाव होने पर भी बिजली की आपूर्ति तुरंत बंद हो जाती है, जिससे उपभोक्ताओं में विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है।
शिकायत निवारण केंद्र से नहीं मिला कोई संतोषजनक जवाब
शनिवार की रात अचानक बिजली गुल होने के बाद परेशान नागरिकों ने अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए महावितरण के आधिकारिक शिकायत निवारण केंद्र पर फोन के माध्यम से संपर्क करने का पुरजोर प्रयास किया, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों से उन्हें कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।
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उपभोक्ताओं ने सीधा आरोप लगाया है कि विभाग द्वारा शिकायत दर्ज कराने के लिए जारी किए गए टोल-फ्री नंबरों पर भी समय पर कोई प्रतिक्रिया या रिपॉन्स नहीं मिलता है, जिससे संकट के समय आम लोगों की मानसिक और शारीरिक परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। महावितरण हर वर्ष मानसून के आगमन से पहले बिजली लाइनों की सुचारू मरम्मत करने, ट्रांसफार्मरों को दुरुस्त करने और पेड़ों की डालियों की कटाई किए जाने का ढिंढोरा पीटता है।
लेकिन पहली ही प्री-मानसून बारिश में समूची बिजली व्यवस्था के चरमरा जाने से इन दावों की जमीनी वास्तविकता अब पूरी तरह सबके सामने आ गई है। हालांकि, गड़चिरोली शहर की बिजली आपूर्ति को देर रात तक जैसे-तैसे बहाल कर दिया गया था, लेकिन तहसील के अंतर्गत आने वाले कई अंदरूनी गांव सुबह होने तक पूरी रात पूरी तरह अंधेरे में ही डूबे रहे।
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नियमित बिल भरने के बाद भी ग्राहकों को नहीं मिल रही संतोषजनक सेवा
ग्रामीणों ने बताया कि रातभर बिजली न रहने के कारण कड़कड़ाती गर्मी, उमस और मच्छरों के भारी प्रकोप का सामना छोटे बच्चों और बुजुर्गों को करना पड़ा, जिससे उनकी पूरी रात की नींद हराम हो गई। आक्रोशित नागरिकों का कहना है कि जब जिला मुख्यालय के ठीक समीप स्थित गांवों में बिजली व्यवस्था की इतनी दयनीय स्थिति बनी हुई है, तो सुदूर दूरदराज और घने जंगलों वाले ग्रामीण क्षेत्रों में हालात कितने बदतर होंगे, इसका केवल सहज अंदाजा ही लगाया जा सकता है।
हर महीने महावितरण द्वारा भेजे जाने वाले अत्यधिक बढ़े हुए बिजली बिलों का समय पर पूरा भुगतान करने के बावजूद, नागरिकों को न्यूनतम संतोषजनक सेवा भी नहीं मिल पा रही है। इस विभागीय लापरवाही के चलते अब गड़चिरोली के आम उपभोक्ताओं में महावितरण प्रशासन के खिलाफ आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि बारिश का मुख्य सीजन शुरू होने से पहले लाइनों को स्थायी रूप से दुरुस्त किया जाए।
