गड़चिरोली जिले में केवल 8 क्लीनिक पंजीकृत, 4 फर्जी डॉक्टरों पर दर्ज हुई एफआईआर

Gadchiroli Fake Doctor: गड़चिरोली स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में बॉम्बे नर्सिंग होम अधिनियम के तहत केवल 8 क्लीनिक पंजीकृत हैं। वर्ष 2025-26 में 4 फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
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गड़चिरोली फर्जी डॉक्टर-फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Gadchiroli Health Department: गड़चिरोली जिले में जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के अधीन बॉम्बे नर्सिंग होम अधिनियम के तहत केवल 8 क्लीनिक पंजीकृत हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले में बिना पंजीकरण के एक भी क्लीनिक संचालित नहीं हो रहा है। साथ ही अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय करने वालों के खिलाफ तहसील स्तरीय समितियों के माध्यम से नियमित कार्रवाई की जा रही है।

पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 और 2024-25 में किसी भी फर्जी डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई थी। हालांकि वर्ष 2025-26 में सिरोंचा तहसील के 3 तथा धानोरा तहसील के 1 व्यक्ति समेत कुल 4 अवैध चिकित्सकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए। संबंधित मामलों में तहसील स्तरीय समिति की जांच के बाद कानूनी कार्रवाई की गई।

गड़चिरोली में 4 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज

ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित क्लीनिकों का पंजीकरण जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा बॉम्बे नर्सिंग होम अधिनियम के तहत किया जाता है। वहीं क्लीनिकों की जांच एवं सत्यापन की जिम्मेदारी तहसील स्वास्थ्य अधिकारी तथा तहसील स्तरीय समितियों के पास होती है, जो समय-समय पर निरीक्षण अभियान चलाती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि, बिना अनुमति चिकित्सा व्यवसाय करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है, और नियमानुसार प्रकरण दर्ज किए जाते हैं। विभाग का कहना है कि, जिले में अवैध चिकित्सा व्यवसाय पर रोक लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था सक्रिय है।

तीन वर्षों में 4 फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई

जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 4 फर्जी डाक्टरों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सिरौचा तहसील में 3 तथा धानोरा तहसील में 1 फर्जी डाक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।

जांच और पंजीकरण की जिम्मेदारी

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के क्लिनिकों का पंजीकरण जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा किया जाता है। जबकि उनके निरीक्षण एवं सत्यापन की जिम्मेदारी तहसील स्वास्थ्य अधिकारी तथा तहसील स्तरीय समितियों के पास होती है।

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