प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Gadchiroli Earthquake News: गड़चिरोली में बार-बार हो रही इस प्रकार की भूकंपीय गतिविधियों के कारण नागरिकों में चिंता बढ़ती जा रही है। पिछले वर्ष तेलंगाना के मुलुगू क्षेत्र में 5.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसका असर आसपास के इलाकों में भी महसूस किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार गढ़चिरोली जिला भौगोलिक संरचना और कोयला खनन गतिविधियों के कारण भूकंप संभावित क्षेत्र में आता है।
यह इलाका गोदावरी बेसिन का हिस्सा है और भूकंप जोन-3 में शामिल माना जाता है। यहां चल रही कोयला खदानों की गतिविधियां तथा बड़े सिंचाई परियोजनाओं के कारण भूगर्भीय दबाव में परिवर्तन होने की आशंका जताई जाती रही है।
विशेष रूप से तेलंगाना की कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना के अंतर्गत निर्मित मेडिगड्डा बांध को लेकर भी भूगर्भीय प्रभावों पर चर्चा होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े जलाशयों में पानी का अत्यधिक दबाव भी भूकंपीय गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
रामगुंडम क्षेत्र में खनन कार्यों के विस्तार और भौगोलिक परिवर्तनों के चलते भूकंप की आवृत्ति में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार गड़चिरोली के दक्षिणी भाग में उमानूर, जाफराबाद और महागांव जैसे क्षेत्रों के आसपास भी कंपन दर्ज किए गए हैं।
अब भूकंप का केंद्र तेलंगाना की ओर खिसकने और तीव्रता 3.9 तक पहुंचने से भविष्य में बड़े झटकों की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील श्रेणी में आता है, ऐसे में खनन गतिविधियां और बड़े बांधों में जल संचयन भूगर्भीय प्लेटों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।
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मध्यरात्रि में आए इन झटकों के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। संबंधित विभागों द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है तथा आपदा प्रबंधन तंत्र को तैयार रहने के निर्देश दिए गए है। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सतर्क रहने की अपील की है।