
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Gadchiroli Water Crisis News: गड़चिरोली में ग्रीष्मकाल के दिनों में चहओर जलसंकट की स्थिति निर्माण होती है। जिले में भी ग्रीष्मकाल के दिनों में कुछ गांवों को जलसंकट का सामना करना पड़ता है। ग्रीष्मकाल के दिनों में जलसंकट पर मात करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न उपाययोजना समेत पानी किल्लत का प्रारूप तैयार किया जाता है। इस अंतर्गत जिले के 211 गांवों में इस वर्ष पानी की समस्या निर्माण होने की संभावना है। संबंधित गांवों के नागरिकों को पीने के पानी के लिए भटकना न पड़े, इसलिए जिला प्रशासन द्वारा नियोजन कर 251 उपाययोजना की गई है।
जिला प्रशासन ने पानी किल्लत के निवारनार्थ प्रस्तावित उपाययोजना कर इसके लिए 10.13 करोड़ का नियोजित कृति प्रारूप प्रस्तावित किया है। जिप के जलापूर्ति विभाग अंतर्गत गांवों में पानी की किल्लत दूर करने का प्रयास किया जाएगा। पिछले वर्ष अच्छी बारिश होने से भूजल स्तर बढ़ गया है। जिले में पानी रोकने के लिए विशेष प्रयास नहीं होने से प्रति वर्ष ग्रीष्मकाल की अवधि में जिले के दुर्गम और ग्रामीण परिसर में पानी किल्लत की समस्या निर्माण होती है।
ग्रीष्मकाल के दिनों में निर्माण होने वाली पानी की समस्या कम करने के लिए जिला प्रशासन ने प्रारूप निश्चित किया है। इस अंतर्गत जिला परिषद के विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण अंत में जिले के 92 गांवों समेत 199 बस्तियों का समावेश पानी किल्लत प्रारूप में किया गया है। इन गांव और बस्तियों में पानी की समस्या दूर करने के लिए जिप के जलापूर्ति विभाग ने उपाययोजना शुरू कर दी है। इस अंतर्गत संबंधित गांव, बस्तियों में नए कुओं का निर्माण, सार्वजनिक कुओं का गहराईकरण, नल जलापूर्ति की विशेष दुरुस्ती करने, हैंडपंप दुरुस्ती का नियोजन किया गया है। इसके लिए करीब 10.13 करोड़ के प्रस्ताव को जिला प्रशासन ने मंजूरी प्रदान की है। प्रस्ताव जिलाधीश के पास पेश किया जाएगा। इसके बाद संबंधित गांव बस्ती में जलसंकट दूर करने का नियोजन किया जाएगा।
गड़चिरोली जिले में गत वर्ष औसतन से अधिक यानी रिकार्ड बारिश दर्ज की गई है। जिससे जिले का जलस्तर बढ़कर भूगर्भ जलस्तर में 0.58 मी। वृध्दि हुई है। भूजल सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण अनुसार जिले के 68 पाणलोट क्षेत्र में से 59 पाणलोट क्षेत्र में 0 से 1 मी। की वृध्दि हुई है। 8 पाणलोट क्षेत्र में 1 से 2 मी। वृध्दि तो एक पाणलोट क्षेत्र में 2 से 3 मीटर की वृध्दि हुई है। जिससे इस वर्ष ग्रीष्मकाल में पानी की किल्लत की तीव्रता कम होने की उम्मीद है।
यह भी पढ़ें:- अमरावती मनपा में सत्ता की तस्वीर साफ, महापौर होंगे श्रीचंदतेजवानी; उपमहापौर के लिए सचिन भेंडे का नाम
| तहसील | गांव | बस्ती | कुल |
|---|---|---|---|
| कोरची | 18 | 19 | 37 |
| कुरखेडा | 15 | 6 | 21 |
| देसाईगंज | 4 | 0 | 4 |
| आरमोरी | 11 | 7 | 18 |
| गड़चिरोली | 6 | 11 | 17 |
| धानोरा | 8 | 36 | 44 |
| चामोर्शी | 6 | 4 | 10 |
| मुलचेरा | 6 | 4 | 10 |
| अहेरी | 7 | 17 | 24 |
| एटापल्ली | 2 | 5 | 7 |
| भामरागड़ | 5 | 9 | 14 |
| सिरोंचा | 4 | 1 | 5 |
| कुल | 92 | 119 | 211 |
इस संबंध में जलापूर्ति विभाग, जिला परिषद के कार्यकारी अभियंता विनोद उद्धरवार ने बताया कि ग्रीष्मकाल के दौरान संभावित गांवों और बस्तियों में पानी की समस्या न बने, इसके लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है और तत्परता से सभी उपाययोजनाएं अमल में लाई जा रही हैं।






