आष्टी का वनोपज जांच नाका ‘रामभरोसे’, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
गड़चिरोली के आष्टी में वनोपज नाके की लापरवाही पर सवाल, अवैध तस्करी बढ़ने की आशंका।
Gadchiroli District: गड़चिरोली जिले की चामोर्शी तहसील अंतर्गत आने वाले आष्टी गांव समीपस्थ वैनगंगा नदी के पास वन विभाग द्वारा शुरू किया गया वनोपज जांच नाका इन दिनों रामभरोसे दिखाई दे रहा है.
एक समय में अवैध तस्करी पर लगाम कसने वाला नाका अब केवल शोपीस बनकर रह गया है. विशेषत जांच के बगैर ही अनेक वाहनों को छोड़ा जा रहा है. जिससे वनविभाग के कार्यप्रणाली पर प्रश्न उपस्थित हो रहा है. मार्कंडा कं वनपरिक्षेत्र कार्यालय द्वारा आष्टी में करीब 30 से 35 वर्ष पहले वनोपज जांच नाका तैयार किया गया था.
उस समय इस महामार्ग पर सभी वाहनों को बैरीकेट्स की सहायता से रोककर जांच और पंजीयन करने के बाद छोड़ा जा रहा था. विशेषत उक्त जांच मुहिम दिनरात शुरू थी. जिससे वाहनों की सहायता से होने वाली तस्करी रोकने में काफी मदद हो रही थी. लेकिन कुछ वर्ष पहले नेशनल हाईवे और नाली निर्माण के चलते नाका कार्यालय गिराए जाने से वर्तामन स्थिति में वाहनों की जांच होते दिखाई नहीं दे रही है.
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बॉक्स हेतुवनविभाग को ध्यान देने की आवश्यकता इस नाके पर तीन वनरक्षक, एक वनपाल, एक चौकीदार और एक वनमजदूर नियमित रूप से सेवा देते है. ऐसा होने के बाद भी जांच नाके पर एक भी वाहन की जांच नहीं होने और वाहनों को भी नहीं रोका जा रहा है. दिनभर वाहनचालक स्वयं अपनी वाहन रोककर पंजीयन कराते है.
ऐसे स्थिति में अवैध यातायात को छूट मिलने की चर्चा शुरू है. जिससे वनविभाग को इस ओर गंभीरता से ध्यान देकर उपाययोजना करने की आवश्यकता होने की बात कही जा रही है.
