

Vidarbha State Movement: स्वतंत्र विदर्भ राज्य की 121 वर्षों से चली आ रही मांग को दिसंबर 2027 से पहले निर्णायक रूप से पूरा कराने के उद्देश्य से विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने 'विदर्भ राज्य निर्माण 'अभी नहीं तो कभी नहीं' का संकल्प लिया है। आगामी 8 सितंबर को अहेरी के इंडियन पैलेस फंक्शन हॉल में विदर्भनिर्माण जनसंकल्प मेले का आयोजन किया जाएगा। इसी के संबंध में आयोजित पत्रकार परिषद में समिति के अध्यक्ष तथा पूर्व विधायक एडवोकेट वामनराव चटप ने आंदोलन की आगामी भूमिका स्पष्ट की। पत्रपरिषद में चटप ने महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य की कुल राजस्व आय लगभग 6 लाख 16 हजार 99 करोड़ रुपये, जबकि राजस्व व्यय 6 लाख 56 हजार 651 करोड़ रुपये है।
उन्होंने बताया कि बजटीय घाटा 40,552 करोड़ रुपये तथा राजकोषीय घाटा 1 लाख 50 हजार 491 करोड़ रुपये है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य का कुल वार्षिक खर्च लगभग 7 लाख 69 हजार 467 करोड़ रुपये है। राज्य पर करीब 11 लाख 2 हजार 454 करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि इस कर्ज पर लगभग 64 हजार 659 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाना पड़ता है। इसके अलावा ठेकेदारों के करीब 96 हजार 400 करोड़ रुपये के भुगतान लंबित होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य आर्थिक दिवालियापन की ओर बढ़ रहा है।
चटप ने कहा कि विदर्भ में सिंचाई का लगभग 60 हजार करोड़ रुपये का अनुशेष अभी भी बाकी है। सार्वजनिक स्वास्थ्य, उद्योग, ऊर्जा, शिक्षा, सड़क, पेयजल, ग्राम विकास, आदिवासी विकास और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में भी लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का अनुशेष है। उनके अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में विदर्भका यह अनुशेष कभी पूरा नहीं हो पाएगा तथा सक्षम व आर्थिक रूप से मजबूत विदर्भ के लिए स्वतंत्र विदर्भ राज्य का निर्माण ही एकमात्र विकल्प है।
समिति ने नागरिकों से अपील की है कि 8 सितंबर को अहेरी में आयोजित विदर्भ निर्माण जनसंकल्प मेले में बड़ी संख्या में उपस्थित होकर स्वतंत्र विदर्भ राज्य के संकल्प को मजबूत करें। पत्रपरिषद में मुकेश मासुरकर, अरुण केदार, डॉ. रमेश गजबे, मारोतराव बोथले, अरुण मुनघाटे, अशोक पोरेड्डीवार, प्रकाश ताकसांडे, चंद्रशेखर भडांगे, मोतीराम लाटेलवार, विलास रापरतीवार, प्रा. नागसेन मेश्राम, उमाजी गोवर्धन, बालकृष्ण सावसाकडे, सीताराम कुलेटी, सीमाताई दडमल, गुरुदेव कोपचे समेत समिति के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।