गड़चिरोली में नक्सलवाद तो घटा, लेकिन आदिवासियों पर दर्ज मुकदमों का बोझ कब हटेगा? धारा 110 से राहत की प्रतीक्षा

Gadchiroli News Naxalism Old Cases: नक्सलवाद के दौर के धारा 110 मामलों की समीक्षा की मांग तेज हुई है। ग्रामसभाएं दबाव में नक्सलियों की मदद करने वालों और गंभीर अपराधियों में अंतर की मांग कर रही हैं।
Gadchiroli Tribals Naxal Rehabilitation Policy
गड़चिरोली आदिवासीसोर्स:फोटो नवभारत
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Gadchiroli Tribals Naxal Rehabilitation Policy: गड़चिरोली में नक्सलवाद के दौर में कथित दबाव में नक्सलियों की मदद करने के आरोप में आदिवासी ग्रामीणों पर की गई धारा 110 की प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।

ग्रामसभा प्रतिनिधियों का कहना है कि गंभीर अपराधों में सीधे शामिल लोगों और धमकी या दबाव में सहायता करने वालों के बीच अंतर किया जाना चाहिए।

पुराने मामलों में घिरे आदिवासी

गड़चिरोली जिले में नक्सलवाद का प्रभाव कम होने और गड़चिरोली को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन की ओर से सफलता के दावों के बीच पुराने मामलों का मुद्दा फिर सामने आया है। नक्सलवाद के दौर में भय और दबाव के कारण कथित रूप से नक्सलियों की मदद करने वाले आदिवासी ग्रामीणों के खिलाफ की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की समीक्षा की मांग तेज हो रही है।

धारा 110 से राहत की प्रतीक्षा

ग्रामसभा प्रतिनिधियों का कहना है कि नक्सलवाद का प्रभाव कम होने के बावजूद कई ग्रामीणों के सिर पर पुराने मामलों का बोझ बना हुआ है। उन्हें आज भी पुलिस थानों में हाजिरी देने और न्यायालयीन प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।

नक्सलियों के दबाव में मदद का दावा

गड़चिरोली के दुर्गम और अतिदुर्गम क्षेत्रों में नक्सलवाद के प्रभाव के दौरान ग्रामीणों के सामने दोहरी चुनौती होने का ग्रामसभा प्रतिनिधियों का दावा है। एक ओर सुरक्षा बलों की कार्रवाई और दूसरी ओर जंगलों में सक्रिय नक्सलियों का दबाव था।

ग्रामसभा प्रतिनिधियों के अनुसार, नक्सलियों द्वारा ग्रामीणों को भोजन-पानी उपलब्ध कराने या अन्य सहायता करने के लिए मजबूर किया जाता था। इनकार करने पर जान से मारने या परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दिए जाने की बात भी सामने रखी गई है।

ऐसे माहौल में भय के कारण किसी ग्रामीण ने नक्सलियों को सहायता उपलब्ध कराई हो, तो उसकी वास्तविक भूमिका की जांच किए बिना उसे नक्सल समर्थक मानना उचित है या नहीं, ग्रामसभाएं इसी सवाल पर पुनर्विचार की मांग कर रही हैं।

धारा 110 के मामलों की समीक्षा की मांग

ग्रामसभा पदाधिकारियों के अनुसार, ऐसे कई नागरिकों के खिलाफ धारा 110 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई थी। इसके कारण संबंधित लोगों को पुलिस थाने में हाजिरी देने, पूछताछ का सामना करने और न्यायालयीन प्रक्रिया में शामिल होने जैसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है।

ग्रामसभाओं की मांग है कि पुराने मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और उस समय की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाए। विशेष रूप से यह देखा जाए कि संबंधित व्यक्ति ने स्वेच्छा से नक्सल गतिविधियों में भाग लिया था या भय और दबाव के कारण नक्सलियों की सहायता करने के लिए मजबूर हुआ था।

गंभीर अपराधों में शामिल लोगों पर कार्रवाई का विरोध नहीं

ग्रामसभाओं ने गंभीर अपराधों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध नहीं किया है। उनका कहना है कि हत्या, आगजनी, फिरौती, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या अन्य गंभीर अपराधों में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने वालों और केवल धमकी या दबाव में सहायता करने वालों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि प्रत्येक पुराने मामले की वास्तविक भूमिका के आधार पर समीक्षा की जानी चाहिए।

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2019 में भी उठी थी मांग

धारा 110 के तहत की जाने वाली कार्रवाई का मुद्दा नया नहीं है। ग्रामसभा पदाधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2019 में गड़चिरोली जिले की लगभग 980 ग्रामसभाओं ने विभिन्न मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित किया था। इनमें धारा 110 से संबंधित कार्रवाई समाप्त करने की मांग भी शामिल थी।

कई वर्ष बीतने के बाद भी यह मुद्दा पूरी तरह हल नहीं होने का ग्रामसभा पदाधिकारियों का कहना है। ग्रामसभाओं की ओर से नक्सलियों की पुनर्वास नीति का भी संदर्भ दिया जा रहा है।

विकास के साथ विश्वास भी जरूरी

गड़चिरोली में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और औद्योगिक विकास को गति देने के प्रयासों के बीच प्रशासन और आदिवासी समाज के बीच विश्वास मजबूत करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्रामसभा प्रतिनिधियों के अनुसार, नक्सलमुक्त गड़चिरोली की संकल्पना केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आदिवासी समाज के मन से भय दूर करने और सरकार के प्रति विश्वास मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए

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