गड़चिरोली में स्मार्ट मीटर से बिजली बिल का झटका, सोलर उपभोक्ताओं को 50 हजार तक के बिल

Gadchiroli Smart Meter: गड़चिरोली के आरमोरी में स्मार्ट मीटर के बाद कई महीनों तक मीटर रीडिंग नहीं लेने से उपभोक्ताओं को 50 हजार रुपये से अधिक तक के बिजली बिल मिले हैं।
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गड़चिरोली स्मार्ट मीटर(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Armori Electricity Bill: बिजली बिल का बोझ कम करने के उद्देश्य से लाखों रूपए खर्च कर घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं को ही अब हजारों रूपये के बिजली बिल का झटका लग रहा है। स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद कई उपभोक्ताओं की चार, छह और कुछ मामलों में लगातार आठ महीने तक नियमित मीटर रीडिंग नहीं लिए जाने की शिकायत सामने आई है। इसके चलते कई महीनों की बिजली खपत एक साथ बिल में जोड़ दी गई।

जिसका खामियाजा कुछ उपभोक्ताओं को 10 से 12 हजार रुपए से लेकर 50 हजार रुपए से अधिक के बिल प्राप्त हुए हैं। इससे सोलर उपभोक्ताओं के साथ-साथ सामान्य बिजली ग्राहकों में भी नाराजगी है। आरमोरी शहर और आसपास के क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद नियमित मीटर रीडिंग की प्रक्रिया प्रभावित होने का आरोप उपभोक्ताओं ने लगाया है। समय पर रीडिंग नहीं लिए जाने के कारण कई महीनों की खपत एक साथ बिल में जोड़ दी गई और उपभोक्ताओं पर एकमुश्त राशि का भार पड़ा।

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सोलरधारकों में भी निराशा

बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से सोलर सिस्टम लगाने के बावजूद भारी-भरकम बिल मिलने से सोलरधारकों में भी निराशा है। मीटर की नियमित रीडिंग क्यों नहीं ली जा रही है, इस संबंध में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पूछताछ करने पर 'मीटर रीडिंग लेने के लिए फिलहाल एजेंसी उपलब्ध नहीं है' ऐसा जवाब दिए जाने का दावा उपभोक्ताओं ने किया है।

उपभोक्ताओं का सवाल है कि रीडिंग लेने के लिए एजेंसी उपलब्ध कराना महावितरण की प्रशासनिक अथवा ठेका व्यवस्था का हिस्सा है। इसकी कीमत ग्राहक क्यों चुकाएं? एजेंसी उपलब्ध नहीं होने के कारण रीडिंग न लेना और बाद में कई महीनों का एक साथ बिल जारी करना, इस पूरी व्यवस्था का आर्थिक भार उपभोक्ताओं पर डालना उचित नहीं है, ऐसी नाराजगी व्यक्त की जा रही है।

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रीडिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी

इस मामले में उपभोक्ताओं द्वारा महावितरण के अधिकारियों से शिकायत किए जाने के बाद रीडिंग प्रक्रिया में त्रुटि होने की बात विभाग की ओर से स्वीकार किए जाने का दावा भी उपभोक्ताओं ने किया है। हालांकि, केवल गलती स्वीकार करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। कई महीनों तक मीटर रीडिंग क्यों नहीं ली गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है।

आर्थिक भार ग्राहक क्यों उठाएं

महावितरण की ओर से मीटर रीडिंग नहीं लेने, गलत रीडिंग दर्ज करने अथवा बिलिंग प्रक्रिया में त्रुटि के कारण यदि अतिरिक्त राशि वसूल की गई है, तो उसका आर्थिक भार उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए, ऐसी मांग की जा रही है।

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