

Water Supply Project Faces Extra Cost Burden: छत्रपति संभाजीनगर जिले की दशकों पुरानी जलापूर्ति समस्या को खत्म करने के उद्देश्य से शुरू की गई 2740 करोड़ रुपये की नई जलापूर्ति योजना अब सिर्फ निर्माण की रफ्तार ही नहीं, बल्कि बढ़ते खर्च को लेकर भी चर्चा में है।
परियोजना का 70 प्रतिशत से अधिक काम पूरा होने के बाद मनपा के सामने करीब 317 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च का भार खड़ा हो गया है। इसका अर्थ यह है कि मूल परियोजना पूरी होने तक मनपा को स्वीकृत लागत के अलावा बड़ी अतिरिक्त राशि की व्यवस्था करनी होगी। ऐसे में योजना के शेष काम के साथ बढ़ी लागत का प्रबंधन भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
इस परियोजना में लागत बढ़ने के पीछे कोई एक कारण नहीं है। निर्माण के दौरान आवश्यक हुए अतिरिक्त कार्य, पाइपलाइन के दायरे में वृद्धि, सड़कों की बहाली और निविदा की अपेक्षाकृत अधिक दर ने मिलकर खर्च बढ़ाया है। सबसे अधिक चर्चा जैकवेल की लागत को लेकर है। प्रारंभिक अनुमान में इसके लिए लगभग 25 करोड़ रुपये का प्रावधान था।
बाद में इससे संबंधित कई निर्माण कार्य जोड़े गए और इसकी लागत 100 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। जैकवेल के साथ बांध की सीमेंट की दीवार, पीएबी शेड और चार स्थानों पर खोज टैंक जैसे निर्माण किए गए। इन अतिरिक्त कार्यों ने मूल अनुमान और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर पैदा कर दिया।
नई जलवाहिनियां बिछाने के लिए शहर की बड़ी संख्या में सड़कों की खुदाई की गई है। अब इन सड़कों को दोबारा यातायात योग्य बनाने का खर्च भी परियोजना के कुल आर्थिक भार में जुड़ रहा है। ठेकेदार की ओर से सड़क बहाली के लिए करीब 88 करोड़ रुपये का अनुमान दिया गया है।
शहर में पाइपलाइन का नेटवर्क जितना विस्तृत है, सड़क बहाली की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है। इसलिए यह राशि परियोजना के अंतिम खर्च को प्रभावित करने वाली प्रमुख मद बन गई है।
इसके अलावा परियोजना की निविदा अनुमानित लागत से करीब नौ प्रतिशत अधिक दर पर स्वीकार की गई थी। इस अंतर का आर्थिक प्रभाव भी मनपा पर पड़ रहा है। यानी परियोजना की लागत केवल निर्माण सामग्री या अतिरिक्त काम के कारण ही नहीं बढ़ी, बल्कि निविदा दर का असर भी इसमें शामिल है।
नई जलापूर्ति व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शहर का आंतरिक वितरण नेटवर्क है। कुल 1900 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने की योजना में लगभग 1200 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। करीब 700 किलोमीटर पाइप लाइन अभी बिछाई जानी बाकी है।
इसका एक हिस्सा उन क्षेत्रों में जाएगा, जहां फिलहाल जलापूर्ति नेटवर्क नहीं है, जबकि अन्य हिस्सों में पुरानी जल वाहिनियों को बदला जाएगा। दूषित पानी की शिकायत वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की योजना है। बिना नेटवर्क वाले क्षेत्रों में मनपा नए नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर रही है।
आवेदन के लिए संपत्ति कर भुगतान की रसीद आवश्यक होगी और नए कनेक्शन के लिए करीब छह हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, मौजूदा पाइप लाइन को बदलकर नई पाइप लाइन बिछाए जाने वाले क्षेत्रों में 45 हजार कनेक्शन ठेकेदार एजेंसी के माध्यम से दिए जाने हैं। इन कनेक्शनों के लिए संपत्ति मालिकों से अलग शुल्क नहीं लिया जाएगा।
सिडको-हडको की जलापूर्ति व्यवस्था को सातारा-देवलाई क्षेत्र से जोड़ने के लिए 1118 मिमी व्यास वाली मुख्य जलवाहिनी पर क्रॉस कनेक्शन किया जाना है। इसके लिए अस्थायी रूप से जलापूर्ति बंद रखनी पड़ेगी। प्रशासन के अनुसार यह काम लगभग एक माह में पूरा किया जा सकता है।
इसी तरह 56 एमएलडी क्षमता की 900 मिमी व्यास वाली पाइपलाइन से जलापूर्ति बढ़ाने के लिए भी शटडाउन लिया जाएगा। इन दोनों कार्यों का उद्देश्य नई व्यवस्था को अंतिम रूप देकर शहर में पानी के वितरण को अधिक व्यवस्थित करना है।
नई जलापूर्ति योजना का मूल उद्देश्य शहर को पर्याप्त और नियमित पानी उपलब्ध कराना है। लेकिन परियोजना के पूरा होने से पहले ही 317 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक भार सामने आना मनपा के लिए गंभीर वित्तीय विषय है। अब प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी है।
एक ओर शेष पाइपलाइन और वितरण नेटवर्क का काम समय पर पूरा करना है, वहीं दूसरी ओर बढ़ी लागत के लिए वित्तीय व्यवस्था करनी है। योजना पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 2740 करोड़ रुपये की मूल परियोजना और अतिरिक्त खर्च मिलाकर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था की वास्तविक कीमत कितनी बैठती है।