

Gadchiroli Irrigation Crisis: कन्नमवार जलाशय से धान की खेती के लिए पानी छोड़े हुए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन नहर के अंतिम छोर पर स्थित लखमापुर बोरी गांव की खेतों तक अब तक पानी नहीं पहुंचा है। वर्तमान में धान रोपाई का मौसम पूरे जोर पर है और खेतों में पानी की अत्यंत आवश्यकता है। इसके बावजूद किसानों को पानी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सिंचाई विभाग की अनदेखी और शून्य नियोजन के कारण क्षेत्र के किसान मुश्किलों में फंस गए हैं। कन्नमवार जलाशय से लखमापुर बोरी तक पानी पहुंचाने की मांग को लेकर ग्रामीणों और किसानों ने पहले भी कई बार ज्ञापन सौंपे थे।
साथ ही समाचारों के माध्यम से भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया था। इस बीच सोमवार को कन्नमवार जलाशय से पानी छोड़ा गया। हालांकि जलाशय से पानी छोड़े जाने के बावजूद बांध से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित लखमापुर बोरी के खेतों तक चार दिन बाद भी पानी की एक बूंद नहीं पहुंची है। इससे सिंचाई विभाग की जल वितरण व्यवस्था और नियोजन पर सवाल खड़े हो गए हैं। सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेकर लखमापुर बोरी के खेतों तक जल्द से जल्द पानी पहुंचाना चाहिए। साथ ही पानी वितरण में हो रही देरी की जांच कर भविष्य में नहर के अंतिम छोर पर स्थित गांवों को पानी से वंचित न रहना पड़े, इसके लिए स्थायी नियोजन किया जाए, ऐसी मांग किसानों और ग्रामीणों द्वारा की जा रही है।
लखमापुर बोरी क्षेत्र में धान की खेती का बड़ा रकबा है और वर्तमान में रोपाई के लिए पानी की सबसे अधिक आवश्यकता है। लेकिन नहर के अंतिम छोर पर स्थित लखमापुर बोरी को हर वर्ष पानी के लिए आखिरी प्राथमिकता मिलने की किसानों में भावना है। पानी छोड़े जाने के बाद भी नियोजन के अभाव में अंतिम गांव तक पानी पहुंचने में देरी हो रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
जलाशय से पानी छोड़ने से पहले नहरों की स्थिति, पानी का प्रवाह और अंतिम गांव तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था का नियोजन किया जाता है या नहीं, ऐसा सवाल किसान उठा रहे हैं। किसानों का कहना है कि, रोपाई का समय बीत जाने के बाद पानी मिलने का क्या फायदा? इस सवाल को लेकर उनमें सिंचाई विभाग के प्रति काफी नाराजगी है।