

Gadchiroli Forest Rights Claims: गडचिरोली जिले में वनाधिकार दावों की त्रुटियां दूर करने तथा लंबित एवं नए पात्र दावों का निपटारा करने के लिए सरकार द्वारा दी गई समयावधि बेहद कम होने का आरोप लगाते हुए जिला महासभा आक्रामक हो गई है। 2 अक्टूबर को समयावधि समाप्त होने से पहले इसे बढ़ाने की घोषणा की जाएं, अन्यथा ग्रामीणों को साथ लेकर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी महासभा ने दी है।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के निर्देशों के आधार पर जिलाधिकारी ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक जिले में वनाधिकार दावों के निपटारे के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं। इस अवधि में त्रुटिपूर्ण दावों, सुधार आवश्यक वाले दावों तथा नए पात्र दावों को प्रक्रिया में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, सरकार की ओर से पहले व्यापक जनजागृति और विशेष अभियान नहीं चलाए जाने के कारण ग्रामीणों को आवश्यक दस्तावेज जुटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला, ऐसा आरोप जिला महासभा ने लगाया है।
वनाधिकार दावे प्रस्तुत करने के लिए राजस्व, वन विभाग सहित अन्य सरकारी अभिलेखों से संबंधित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। दुर्गम एवं ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को ये दस्तावेज प्राप्त करने के लिए संबंधित कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में कुछ ही दिनों की अवधि में सभी दस्तावेजों की पूर्ति कर दावा प्रस्तुत करना कई पात्र नागरिकों के लिए मुश्किल हो रहा है।
वनाधिकार दावा मंजूर होने के बाद संबंधित किसान को पट्टा प्राप्त होता है, जिससे उसे कृषि से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का अवसर मिलता है। लेकिन पात्र होने के बावजूद समय के अभाव में दावा प्रस्तुत नहीं किया जा सका अथवा त्रुटियों की पूर्ति नहीं हो पाई, तो संबंधित किसान विभिन्न योजनाओं के लाभ से वंचित रह सकते हैं। इसलिए समयावधि समाप्त होने के कारण पात्र नागरिकों के अधिकार प्रभावित न हों, ऐसी मांग महासभा ने की है।
2 अक्टूबर की समयावधि नजदीक आने के बीच जिला महासभा की ओर से राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसमें वनाधिकार दावों की त्रुटियों की पूर्ति, आवश्यक सरकारी दस्तावेज प्राप्त करने तथा नए पात्र दावे प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की जाएगी।