तेंदुए की खाल के साथ 2 आरोपी गिरफ्तार, DRI की गोंदिया के देवरी में बड़ी कार्रवाई; वन विभाग में हड़कंप

Gondia Leopard Skin Smuggling Forest Department: देवरी में DRI नागपुर ने तेंदुए की खाल के साथ दो आरोपियों को हिरासत में लिया। मोहनटोला में कार्रवाई के बाद आरोपी और जब्त सामग्री वन विभाग को सौंपी गई।
Gondia Deori Wildlife Crime Leopard Skin Smuggling
तेंदुए की खाल के साथ 2 गिरफ्तार!सोर्स: सोशल मीडिया
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Gondia Deori Wildlife Crime Leopard Skin Smuggling: राजस्व गुप्तवार्ता निदेशालय (DRI) नागपुर की टीम ने देवरी क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए तेंदुए की खाल के साथ दो आरोपियों को हिरासत में लिया। कार्रवाई 29 सितंबर को देवरी-पुराडा मार्ग पर मोहनटोला के पास की गई। दोनों आरोपियों और जब्त सामग्री को आगे की जांच के लिए वन विभाग के सुपुर्द किया गया है।

मोहनटोला के पास बिछाया जाल

गोंदिया, वन्यजीव तस्करी के खिलाफ DRI नागपुर की टीम ने मंगलवार, 29 सितंबर को देवरी क्षेत्र में कार्रवाई की। टीम को वन्यजीव तस्करी से संबंधित गुप्त सूचना मिली थी। इसके आधार पर देवरी-पुराडा मार्ग पर मोहनटोला के पास निगरानी और जाल बिछाया गया।

कार्रवाई के दौरान टीम ने तेंदुए की खाल के साथ दो संदिग्धों को हिरासत में लिया। उनके कब्जे से तेंदुए की खाल के अलावा अन्य सामग्री भी जब्त किए जाने की जानकारी है।

दो आरोपी हिरासत में

कार्रवाई के दौरान धनराज उईके (35), निवासी ढिवरीनटोला तथा नीलकंठ रामचंद्र पंधरे (37), निवासी श्रीरामनगर, तहसील सड़क अर्जुनी को हिरासत में लिया गया।

DRI टीम ने दोनों आरोपियों और जब्त सामग्री को आगे की कार्रवाई एवं जांच के लिए देवरी वन विभाग के सुपुर्द कर दिया है।

खाल कहां से आई, किसे देनी थी?

अब वन विभाग की जांच का मुख्य केंद्र तेंदुए की खाल का स्रोत और संभावित खरीदार है। जांच की जा रही है कि खाल कहां से लाई गई थी और आरोपियों तक इसे किसने पहुंचाया।

इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि खाल को किस व्यक्ति या गिरोह को सौंपा जाना था। मामले में आरोपियों के साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हैं तथा वन्यजीव तस्करी का कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

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वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत अपराध

तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित वन्यजीव है। तेंदुए की खाल रखना, उसका अवैध व्यापार करना, खरीदना या बेचना कानूनन अपराध है। इसलिए बरामद खाल को जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।

अब वन विभाग की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में तस्करी का नेटवर्क कितना बड़ा है और खाल की आपूर्ति एवं बिक्री से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या थी।

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