राज्य चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, आगामी स्थानीय निकायों में OBC सीटों के लिए चुनाव स्थगित
- Written By: किर्तेश ढोबले
फाइल फोटो
मुंबई: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा स्थानीय निकायों (Local Bodies Election) में ओबीसी आरक्षण पर रोक लगाने के बाद राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य चुनाव आयोग ने आगामी स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षित सीटों को स्थगिती (Postponement OBC reserved seats) दी है। बता दें कि राज्य की 106 नगर पंचायतों की 400 सीटों पर चुनाव होने थे। लेकिन ओबीसी आरक्षण पर कानूनी मुद्दों के कारण उन्हें स्थगित कर दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक राज्य चुनाव आयोग ने स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षित सीटों का चुनाव स्थगित कर दिया है, लेकिन अन्य श्रेणियों के चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे। यह चुनाव राज्य की 106 नगर पंचायतों की कुल 1 हजार 802 सीटों पर होगा। जिसमें 1,802 में से 337 सीटों पर ओबीसी आरक्षण है।
नगर परिषद, जिला परिषद और ग्राम पंचायत ओबीसी आरक्षित सीटों के चुनाव भी स्थगित
गौरतलब है कि भंडारा नगर परिषद की कुल 52 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। जिनमें से 13 सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित हैं। उन्हें भी स्थगिती मिल गई है। इसके अलावा गोंदिया जिला परिषद की 53 ओबीसी सीटों में से 10 के लिए चुनाव स्थगित कर दिया गया है। पंचायत समिति की 45 और नगर निगम की एक सीट पर सीटों का चुनाव भी टाल दिया गया है।
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इसके अलावा राज्य की कुल 5,454 ग्राम पंचायतों में से 7,130 सीटों पर चुनाव होंगे। जहां ओबीसी आरक्षित सीटों के लिए भी चुनाव स्थगित रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने अध्यादेश पर लगाई रोक
आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर राज्य सरकार को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के अध्यादेश पर रोक लगा दी है। जिसके अनुसार आगामी चुनाव में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण नहीं दिया जाएगा, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को भी निर्देश दिया है।
जस्टिस एएम खानविलकर और सीटी रवि कुमार की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के अध्यादेश और उसे लागू करने के लिए राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर आदेश पारित किया।
कोर्ट ने आरक्षण पर रोक लगाते हुए कहा कि, आरक्षण नियमों के मुताबिक नहीं दिया गया था। ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मार्च के महीने में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण दिए जाने के लिए इनकार किया था। जिसके बाद भी महाराष्ट्र सरकार सितंबर में यह अध्यादेश लेकर आई थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
