महाराष्ट्र-कश्मीर-शिवसेना का बंधन हो रहा मजबूत, कश्मीर से लौटकर बोले डॉ. श्रीकांत शिंदे
Shrikant Shinde Statement: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने द्रास के लोगों से किया वादा पूरा कर दिया है। उपजिला अस्पताल को आधुनिक सीटी स्कैन मशीन और एम्बुलेंस सौंपी।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आकाश मसने
द्रास अस्पताल को एंबुलेंस भेंट करते श्रीकांत शिंदे व योगेश कदम (फोटो नवभारत)
Shrikant Shinde Statement On Shiv Sena-Kashmir Bond: कश्मीर के द्रास सेक्टर में ‘सरहद’ और भारतीय सेना के ‘शौर्यथान’ के उद्घाटन एवं द्रास उपजिला अस्पताल में शिवसेना द्वारा उपलब्ध कराई गई सिटी स्कैन एवं एम्बुलेंस के लोकार्पण कार्यक्रम के बाद लौटे शिवसेना संसदीय दल के नेता एवं सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने एक लेख के माध्यम से अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाराष्ट्र एवं कश्मीर के बीच संवाद, अपनत्व एवं वचनपुर्ति का सेतु तैयार हो रहा है। इससे महाराष्ट्र, कश्मीर एवं शिवसेना के बीच बंधन अधिक मजबूत हुआ है।
जम्मू कश्मीर के द्रास में ‘सरहद’ और भारतीय सेना द्वारा आयोजित ‘शौर्यथॉन’ का 22 जून 2025 को उद्घाटन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने किया था। यहां के उपजिला अस्पताल को एक सिटी स्कैन मशीन और एंबुलेंस की जरूरत है, उस समय यह बात स्थानीय लोगों ने एकनाथ शिंदे को बताई। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने उस मांग को पूरा करने का वादा किया था।
22 जून 2026 को जब सिटी स्कैन मशीन और एंबुलेंस द्रास के उपजिला अस्पताल में पहुंची तो स्थानीय लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस अवसर पर महाराष्ट्र-कश्मीर-शिवसेना का बंधन और भी मजबूत हुआ। अस्वस्थता के कारण एकनाथ शिंदे इस कार्यक्रम में उपस्थित न हो सके, लेकिन उनका किया हुआ वादा पूरा करने का अवसर डॉ. श्रीकांत शिंदे और महाराष्ट्र के राज्य के गृह राज्यमंत्री योगेश कदम पहुंचे थे।
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शौर्यथॉन के आयोजन पर क्या बोले श्रीकांत शिंदे
इस पर एकनाथ शिंदे के बेटे व शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा कि ‘सरहद’ संस्था और भारतीय सेना के संयुक्त तत्वावधान में लद्दाख में हर साल ‘शौर्यथॉन’ का आयोजन कर साहस एवं शौर्य के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा दिया जाता है। भारत के नागरिकों को अपने जवानों के शौर्य एवं समर्पण का अनुभव हो और वे कृतज्ञता व्यक्त कर सकें, इस उद्देश्य से यह पहल की गई। इस उपक्रम के साथ एकनाथ शिंदे मजबूती से खड़े रहे हैं।
शिवसेना के लाेकसभा सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा इस बार इस मैराथन के उद्घाटन में शामिल होने का सौभाग्य मुझे मिला। सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत का सुनहरा अवसर मिला। उन्होंने अपने कई अनुभव साझा किए। हमारे जवानों की देशभक्ति के मन को छू लेने वाले कई किस्से सुनने को मिले। वॉर मेमोरियल में शहीद जवानों द्वारा अपने परिवारों को लिखे गए अत्यंत भावनात्मक पत्र पढ़े। अपने जवानों के अतुलनीय शौर्य और बलिदान की घटनाएं प्रत्यक्ष सुनीं। सच में यह दिन बेहद गर्व और राष्ट्रप्रेम को बढ़ाने वाला था।
शौर्यथॉन के आयोजन के दौरान श्रीकांत शिंदे व योगेश कदम (फोटो नवभारत)
बालासाहेब की वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाते शिंदे
कश्मीर मतलब बम विस्फोट, गोलीबारी, आतंक और भय की छाया वाली एक तस्वीर कुछ लोगों ने पेश की, तो इसकी दूसरी छवि भारत का नंदनवन, प्रकृति का वरदान प्राप्त धरती का स्वर्ग है। इन दोनों पहलुओं का अनुभव करते हुए ‘कश्मीरियत’ को सहेजने वाले, संवाद के लिए आतुर और अपनी भूमि से अपार प्रेम करने वाले यहां के नागरिक ही कश्मीर की असली पहचान हैं। लेकिन लगातार आतंक के कारण नकारात्मकता झेलने वाले इन नागरिकों को अब देशवासियों से संवाद और अपनत्व की आकांक्षा-अपेक्षा है। और इसी संवाद सेतु को मजबूत करने का काम वंदनीय शिवसेना प्रमुख हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे के समय से शिवसेना करती आ रही है।
1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों पर हो रहे अन्याय, अत्याचार और रक्तरंजित घटनाओं के जख्म पर मरहम लगाने का कार्य बालासाहेब ने किया था। विस्थापित कश्मीरी पंडितों को महाराष्ट्र में आश्रय दिया। उनके बच्चों के लिए महाराष्ट्र के मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का निर्णय बालासाहेब ने लिया था। जब कश्मीर सुलग रहा था और कुछ आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा रोकने की धमकी दी थी, उस समय कश्मीरी पंडितों पर अन्याय हुआ तो मुंबई से जाने वाली ‘हज’ यात्रा रोकने की चेतावनी भी बालासाहेब ने दी थी। कश्मीरी जनता के साथ मजबूती से खड़े होकर उन्हें विश्वास और अपनत्व देने की स्व. बालासाहेब की यह वैचारिक विरासत एकनाथ शिंदे न सिर्फ संभाल रहे हैं, बल्कि और मजबूती भी प्रदान कर रहे हैं।
एक हजार शिवसैनिकों ने किया रक्तदान
भारत-पाक सीमा पर तैनात जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पिछले साल शिवसेना की ओर से सीधे सैन्य बेस पर रक्तदान शिविर आयोजित किया गया था। करीब 1 हजार शिवसैनिकों ने रक्तदान कर जवानों के साथ सही अर्थों में ‘खून का रिश्ता’ बनाया। ‘आम्ही पुणेकर’ संस्था और 41 राष्ट्रीय राइफल मराठा बटालियन के माध्यम से कुपवाड़ा में सेना के कैंप में छत्रपति शिवाजी महाराज की विशाल अश्वारूढ़ प्रतिमा स्थापित की गई और उसका अनावरण एकनाथ शिंदे साहब के हाथों हुआ था।
डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कारगिल दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची और बेहद प्रतिकूल युद्धभूमि है। 1999 में ‘ऑपरेशन विजय’ के माध्यम से भारत ने इसी कारगिल की धरती पर पाकिस्तान को सबक सिखाया था। उस ऐतिहासिक विजय की याद और वीर सैनिकों के शौर्य की स्मृति के लिए बने कारगिल वार मेमोरियल में ‘लाइट एंड साउंड शो’ बनाने के लिए जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे तब महाराष्ट्र सरकार ने 3 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया। जल्द ही यह काम शुरू हो रहा है।
जम्मू कश्मीर में सेना के जवानों के साथ श्रीकांत शिंदे व योगेश कदम (फोटो नवभारत)
कश्मीर घाटी में जब-जब संकट आया, शिवसेना मदद के लिए आगे रही है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के समय कश्मीर में फंसे महाराष्ट्र के पर्यटकों की मदद के लिए स्वयं एकनाथ शिंदे वहां पहुंचे और विशेष विमानों की व्यवस्था कर सैकड़ों पर्यटकों को सुरक्षित वापस लाए। उसी हमले में पर्यटकों की जान बचाते हुए शहीद हुए स्थानीय घुड़सवार सैयद आदिल हुसैन शाह के परिवार को शिवसेना ने तुरंत 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी। साथ ही अत्यंत दयनीय स्थिति वाले इस परिवार के लिए नया घर भी बनवाकर दिया।
कश्मीर के ऐतिहासिक लाल चौक में होने वाले गणेशोत्सव को भी एकनाथ शिंदे का समर्थन सहयोग प्राप्त है। वहां दोनों धर्मों के लोग एक साथ आते हैं। संस्कृति,सभ्यता के धागे से बंधी ‘कश्मीरियत’ और ‘भारतीयता’ यही तो है।
कश्मीर में बनेगा महाराष्ट्र भवन
कश्मीर जाने वाले पर्यटकों में महाराष्ट्र के पर्यटकों की संख्या सबसे अधिक है। इन पर्यटकों को हक का आश्रय और मदद मिले, इसके लिए श्रीनगर और लद्दाख में ‘महाराष्ट्र भवन’ बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने श्रीनगर हवाई अड्डे के पास, बडगाम जिले के इचगाम में 2.5 एकर जमीन खरीदी है। कश्मीर घाटी में अपना राज्यभवन बनाने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बनेगा। कश्मीर हो या लद्दाख, वहां शिवसेना को कोई राजनीति नहीं करनी है। लेकिन समाजनीति में विश्वास रखने वाले शिंदे साहब ने राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर ‘हिमालय की मदद में दौड़ कर जाने वाला सह्याद्रि’ यह पहचान एक बार फिर अपने कार्यों से सिद्ध किया है।
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आतंक में साए में जीने वाले यहां के नागरिकों ने 2019 में खुली सांस ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। उसके बाद यहां की स्थिति धीरे-धीरे बदलने लगी। शस्त्रों की जगह संवाद ने ली। मुठभेड़ों की जगह शांति की आवाज मुखर होने लगी। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी मुहिमों से पाकिस्तान की नकेल कसी जा रही है। इन सभी प्रयासों को शिवसेना ने हमेशा समर्थन दिया है।
एक समय सीमा पार आतंकियों के हमलों के दबाव में रहने वाला कश्मीर और लद्दाख अब नए सिरे से खड़ा हो रहा है। विकास की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है। ऐसे में देशवासी के रूप में उनका साथ देना हमारी जिम्मेदारी है। कश्मीर सिर्फ एक भूभाग नहीं, बल्कि हमारे देश का माथा है,गर्व है। इसलिए कश्मीर जब अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रयास कर रहा है, तब अन्य राज्यों को भी मदद का हाथ आगे बढ़ाना चाहिए। एकनाथ शिंदे ने स्व.बालासाहेब के विचारों से प्रेरणा लेते हुए कश्मीर के साथ विश्वास, संवाद और अपनत्व का सेतु बनाया है। उनके इस कदम से महाराष्ट्र-कश्मीर-शिवसेना का बंधन सतत मजबूत होता रहेगा, ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है।
