स्थायी समिति की बैठक में शो-पीस बनी महिला पदाधिकारी? तीन सदस्यों की गैर-मौजूदगी पर उठे सवाल
Dhule Municipal Corporation: धुले मनपा की स्थायी समिति में आयुक्त नितिन कापडणीस ने भ्रष्ट कर्मचारियों और ठेकेदारों के गठजोड़ को बेनकाब किया। निलंबन के बाद कचरे के वजन में 60 टन की गिरावट।
- Written By: गोरक्ष पोफली
धुले मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Dhule Municipal Corporation News: धुले महानगरपालिका की सबसे शक्तिशाली और नीति-निर्धारक मानी जाने वाली स्थायी समिति की पहली ही बैठक में सत्ता और प्रशासनिक रसूख का एक अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला। नियमानुसार सदन की पूरी कार्यवाही और नियंत्रण सभापति के हाथ में होना चाहिए, लेकिन यहाँ दृश्य बिल्कुल उल्टा था। सभापति की कुर्सी पर बैठीं लता बाई सोनार पूरी बैठक के दौरान किसी ‘मूक दर्शक’ की तरह नजर आईं। उन्होंने पूरे समय ऐसी चुप्पी साधे रखी, मानो वे केवल उपस्थिति दर्ज कराने और औपचारिकताओं को पूरा करने आई हों। इसके विपरीत, प्रशासन की ओर से आयुक्त नितिन कापडणीस पूरी तरह से ‘लीड रोल’ में दिखे और उन्होंने पूरे सदन को अपनी प्रशासनिक कार्यशैली और तर्कों से प्रभावित किया।
60 टन ‘फर्जी’ कचरे का खेल खत्म
बैठक के दौरान सबसे सनसनीखेज खुलासा शहर की सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन को लेकर हुआ। आयुक्त कापडणीस ने सदन को बताया कि पिछले दिनों जब 16 कामचोर और लापरवाह कर्मचारियों पर निलंबन (Suspension) की गाज गिराई गई, तो उसके तुरंत बाद कचरे के वजन में चमत्कारिक रूप से 50 से 60 मीट्रिक टन की गिरावट दर्ज की गई। इस खुलासे ने सदन में मौजूद सभी सदस्यों को सन्न कर दिया।
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि अब तक कर्मचारी और ठेकेदार मिलकर जनता की गाढ़ी कमाई को लूट रहे थे। कचरे के वजन को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए उसमें सड़क की मिट्टी और भारी पत्थर मिलाए जा रहे थे। इस सिंडिकेट ने सालों से मनपा के खजाने को चूना लगाया था, जिसे अब प्रशासन ने सख्ती से ध्वस्त कर दिया है।
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मुजोरों का पक्ष न लें
बैठक में उस समय तीखी बहस देखने को मिली जब समिति सदस्य धीरज कलंत्री ने मानवीय आधार पर निलंबित कर्मचारियों को एक और मौका देने की वकालत की। इस पर आयुक्त कापडणीस ने किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव में आने से इनकार कर दिया और पार्षदों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ये कर्मचारी काम नहीं करते, जिसके कारण जनता की गालियां पार्षदों को सुननी पड़ती हैं।
आयुक्त ने चेतावनी दी कि यदि इन ‘मुजोर’ कर्मचारियों का पक्ष लिया गया, तो ये और भी बेलगाम हो जाएंगे और शहर की सफाई व्यवस्था कभी नहीं सुधर पाएगी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए वे अनुशासनहीनता के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएंगे।
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नदारद पदाधिकारी और जनमुद्दे
महिला सशक्तिकरण और सक्रिय भागीदारी के दावों के बीच, इस महत्वपूर्ण बैठक से तीन महिला पदाधिकारियों की गैर-मौजूदगी ने भी खूब चर्चा बटोरी। हालांकि, बैठक में उपस्थित अन्य सदस्यों ने शहर के ज्वलंत मुद्दों को उठाया। सदस्य अमोल मासुळे ने धुले को ‘इंदौर मॉडल’ पर स्वच्छ बनाने का सुझाव दिया, जबकि वंदना भामरे ने उन इलाकों की आवाज उठाई जो हाल ही में मनपा की सीमा में शामिल हुए हैं और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। वहीं, विक्रम थोरात ने मानसून को देखते हुए नालों की सफाई का मुद्दा उठाया। कुल मिलाकर, यह बैठक जनहित के मुद्दों से ज्यादा प्रशासन की सख्ती और जनप्रतिनिधियों की लाचारी के लिए याद की जाएगी।
