अमरावती में बच्चू कडू की बड़ी मांग; सरकार Kisan Karj Mafi Yojana में करें बदलाव
Maharashtra Kisan Karj Mafi Scheme: बच्छू काडू ने किसान ऋण माफी में सुधार की मांग करते हुए 2019-25 के प्रभावित किसानों का पूरा कर्ज माफ करने, बजट बढ़ाने और मांगें न मानने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
बच्चू काडू (सोर्सः फाइल फोटो)
Bachchu Kadu Kisan Karj Mafi Yojana Full Relief Demand: शिवसेना शिंदे गुट के नेता बच्चू कडू ने राज्य सरकार की ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान कर्ज माफी योजना’ पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि वर्तमान योजना में कई खामियां हैं और यह किसानों के हित में पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा दी जा रही 50 हजार रुपये की सहायता राशि कम है और इससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह योजना किसानों के बजाय बैंकों की वसूली को अधिक लाभ पहुंचा रही है।
बच्छू काडू की सरकार से अपील
कडू ने मांग की कि 2019 से 2025 के बीच कोरोना और सूखे जैसी परिस्थितियों से प्रभावित सभी किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए। उन्होंने कहा कि जो किसान पहले की कर्ज माफी योजनाओं में पात्र थे लेकिन लाभ नहीं मिला, उन्हें भी तुरंत शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विधवाओं, दिव्यांग किसानों और मृत खाताधारकों के वारिसों को एकमुश्त पूर्ण कर्ज माफी देने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जानी चाहिए, लेकिन सरकार केवल 50 हजार रुपये दे रही है और उसमें भी शर्तें जोड़ दी गई हैं, जिससे कई किसान योजना से वंचित रह सकते हैं। कडू ने इन शर्तों को हटाने की मांग की और कहा कि किसानों का मूलधन भी माफ किया जाना चाहिए।
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आठवें वेतन आयोग से तुलना
बच्चू कडू ने सरकार को सुझाव दिया कि किसान कर्ज माफी के लिए हर वर्ष बजट में कम से कम 25 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाए और पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से किसानों का कर्ज खत्म किया जाए।
उन्होंने कहा कि पूर्ण कर्ज माफी के लिए लगभग 60 से 70 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी, जो सरकार पर बहुत बड़ा बोझ नहीं है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि आठवें वेतन आयोग में सरकार को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का खर्च उठाना पड़ेगा, जबकि किसानों के लिए यह राशि अपेक्षाकृत कम है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती और खामियों को दूर नहीं करती, तो वे आंदोलन करेंगे और विरोध प्रदर्शन की तारीख तय की जाएगी। कडू ने कहा कि चाहे वे किसी भी राजनीतिक भूमिका में हों, किसान, मजदूर और दिव्यांगों के अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी।
