देवनार डंपिंग ग्राउंड में वेस्ट टू एनर्जी परियोजना का 80% काम पूरा, 8 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य

Deonar Waste To Energy Project News: देवनार वेस्ट टू एनर्जी परियोजना का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस परियोजना के जरिए प्रतिदिन 600 मीट्रिक टन कचरे से 8 मेगावाट तक बिजली उत्पादन किया जाएगा।
Deonar Waste To Energy Project
देवनार वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया )
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Deonar Waste To Energy Project: बीएमसी ने देवनार डंपिंग ग्राउंड में कचरे से बिजली उत्पादन (वेस्ट टू एनर्जी) परियोजना शुरू की है, जिसका लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। मनपा आयुक्त अश्विनी भिड़े ने बुधवार को इस परियोजना का निरीक्षण करते हुए कार्य की समीक्षा की।

कचरे से बिजली उत्पादन परियोजना के तहत प्रतिदिन लगभग 600 मीट्रिक टन नगर ठोस कचरे पर वैज्ञानिक तरीके से प्रक्रिया कर करीब 8 मेगावाट तक बिजली का उत्पादन किया जाएगा। वर्तमान में परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और निर्माण व स्थापना का कार्य प्रगति पर है।

ठोस कचरा प्रबंधन कार्यों की समीक्षा

इसके साथ ही देवनार बायो-माइनिंग परियोजना का भी निरीक्षण किया गया तथा ठोस कचरा प्रबंधन कार्यों की समीक्षा की गई। देवनार डंपिंग ग्राउंड वर्ष 1927 से कार्यरत है और इसका क्षेत्रफल लगभग 120 हेक्टेयर है। यहां वर्तमान में प्रतिदिन करीब 600 मीट्रिक टन नगर ठोस कचरा स्वीकार किया जाता है।

इसके अलावा यहां लगभग 185 लाख मीट्रिक टन पुराना जमा कचरा मौजूद है। इस पुराने कचरे पर मनपा की ओर से बायो-माइनिंग का कार्य शुरू किया गया है। पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से वर्गीकरण कर उससे मिट्टी, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री अलग की जा रही है। बायो-माइनिंग के कारण डंपिंग ग्राउंड पर कचरे का भार कम होने और पर्यावरण प्रदूषण घटाने में मदद मिल रही है।

कन्नमवार नगर में सफाई कर्मचारियों से संवाद

मनपा आयुक्त अश्विनी भिड़े ने एस विभाग के विक्रोली (पूर्व) स्थित कन्नमवार नगर सफाई कर्मचारियों की चौकी का 13 मई 2026 की सुबह औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सफाई कर्मचारियों से संवाद करते हुए उनकी उपस्थिति, कार्य का स्वरूप, काम के समय, आवश्यक सामग्री की उपलब्धता तथा दी जा रही सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि मुंबई की सड़कों, आसपास के क्षेत्रों और चौकों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा कचरा जमा होने वाले स्थानों की पहचान कर उनका स्थायी समाधान किया जाए। इसके लिए जन जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए।

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