

Chhatrapati Sambhajinagar Shashikant Ubale Success Story: शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि समाज और भविष्य गढ़ने वाला शिल्पकार होता है। जब शिक्षक अपने दायित्व को नौकरी से आगे बढ़ाकर मिशन बना लेता है, तो उसके प्रयासों का प्रभाव पूरी शिक्षा व्यवस्था पर दिखाई देता है। छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका की सीबीएसई स्कूलों की सफलता इसी बदलाव की कहानी बयां करती है।
वर्ष 2021 में दो स्कूलों से शुरू हुआ यह सफर आज 6 सीबीएसई स्कूलों तक पहुंच चुका है। इस पूरी यात्रा में समन्वयक शशिकांत उबाले की मेहनत, दूर दृष्टि और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। शिक्षक दिवस के अवसर पर उनकी यह यात्रा शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायक उदा हरण बनकर सामने आई है।
गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को भी निजी स्कूलों जैसी गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनपा ने वर्ष 2020-21 में सीबीएसई पद्धति की स्कूलें शुरू करने की पहल की थी।
तत्कालीन मनपा आयुक्त एवं प्रशासक आस्तिक कुमार पांडे की प्रेरणा से वर्ष 2021 में गारखेडा और उस्मानपुरा में दो सीबीएसई स्कूल शुरू किए गए। इन स्कूलों के प्रधानाचार्य और समन्वयक की जिम्मेदारी शशिकांत उबाले को सौंपी गई।
स्कूल शुरू होने के साथ ही कोरोना महामारी ने शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। विद्यालय बंद होने के बावजूद विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उबाले ने शिक्षकों के साथ मिलकर ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था की।
‘शिक्षा आपके द्वार’ उपक्रम के माध्यम से गूगल मीट और एप ब्रिगो एप के जरिए विद्यार्थियों को पढ़ाया गया। स्कूल शुरू होने की जानकारी समाचार पत्र में प्रकाशित होने के बाद अभिभावकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। महज तीन दिनों में दोनों स्कूलों की सभी सीटें भर गई।
शशिकांत उबाले ने स्कूलों को केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रखा। उनका प्रयास रहा कि मनपा की सीबीएसई स्कूलें शिक्षा की गुणवत्ता, तकनीक, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में निजी स्कूलों को भी टक्कर दें। स्मार्ट सिटी परियोजना के माध्यम से स्कूलों को डिजिटल बनाने पर विशेष जोर दिया गया। कक्षाओं में स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर और स्पीकर उपलब्ध कराए गए। इससे विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई अधिक रोचक और प्रभावी बनी।
दो स्कूलों की सफलता और अभिभावकों के बढ़ते विश्वास के बाद मनपा ने सीबीएसई स्कूलों की संख्या बढ़ाई। पहले तीन और बाद में एक और स्कूल शुरू होने के बाद आज मनपा की छह सीबीएसई स्कूलें संचालित हो रही हैं। इन सभी के समन्वय की जिम्मेदारी शशिकांत उबाले संभाल रहे हैं। स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न शैक्षणिक प्रतियोगिताओं को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इन स्कूलों की प्रवेश प्रक्रिया भी पारदर्शी रखी गई है। 30 सीटों के लिए लगभग 150 से 200 आवेदन प्राप्त होते हैं। अभिभावकों की उपस्थिति में लकी ड्रॉ के माध्यम से 30 विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। इससे आर्थिक या सामाजिक भेदभाव के बिना बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने का अवसर मिल रहा है।
उबाले का मानना है कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखना शिक्षा का उद्देश्य नहीं है। प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानना और उसे आगे बढ़ने का अवसर देना शिक्षक की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ गतिविधि आधारित शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न प्रतियोगिताओं पर जोर दिया जा रहा है।
छत्रपति संभाजीनगर विभाग के विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत और मनपा आयुक्त अमोल येडगे के प्रेरणादायी मार्गदर्शन तथा उपायुक्त अंकुश पांढरे, भारत तीनगोटे और संजीव सोनार के मार्गदर्शन में सीबीएसई स्कूलों का कार्य आगे बढ़ रहा है। छह स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण तैयार करने में शशिकांत उबाले और उनकी टीम के प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं।
शिक्षक दिवस पर यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि समर्पित शिक्षक केवल विद्यार्थियों का भविष्य नहीं संवारता, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की दिशा बदलने की क्षमता रखता है। मनपा की सीबीएसई स्कूलों में प्रवेश के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा अभिभावकों के बदलते विश्वास की तस्वीर भी पेश कर रही है।