

AIMIM Vs Atul Save: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका में गुट नेताओं के लिए कक्ष आवंटन को लेकर बुधवार को ऐसा घमासान मचा कि मामला आयुक्त के कक्ष से निकलकर महापौर के कक्ष तक पहुंच गया। वंचित बहुजन आघाड़ी के गुटनेता अफसर खान को करीब दो हजार वर्ग फुट का कक्ष मिलने के बाद एमआईएम नगरसेवकों ने इसे लेकर तीखा विरोध जताया।
कक्ष पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाने का आरोप लगाते हुए एमआईएम ने प्रशासन को घेरा। विरोधी पक्ष नेता समीर साजिद ने आरोप लगाया कि “ आज कल मनपा का कामकाज मंत्री अतुल सावे के इशारे पर चल रहा है।” सावे ने इन आरोपों को नवभारत से बातचीत करते हुए सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मनपा एक स्वायत्त संस्था है और वे उसकी राजनीति में कोई हस्तक्षेप नहीं करते।
एमआईएम नगरसेवक दोपहर करीब तीन बजे महानगरपालिका मुख्यालय पहुंचे। विरोधी पक्ष नेता समीर साजिद के नेतृत्व में नगरसेवकों ने आयुक्त अमोल येडगे के कक्ष के सामने जोरदार नारेबाजी की। नगरसेवकों ने तत्काल आयुक्त से चर्चा की मांग की। सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा कुछ लोगों को रोकने पर कुछ समय के लिए धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनी।
बाद में आयुक्त ने नगरसेवकों को चर्चा के लिए भीतर बुलाया। बातचीत की शुरुआत में एमआईएम नगरसेवकों और प्रशासन के बीच तीखी बहस हुई। नगरसेवकों ने आरोप लगाया कि महानगरपालिका प्रशासन विरोधी दल के साथ जानबूझकर भेदभाव कर रहा है। उनका कहना था कि शहर के सभी क्षेत्रों का समान विकास होना चाहिए और एमआईएम द्वारा उठाए जा रहे नागरिकों के प्रश्नों को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
आयुक्त अमोल येडगे ने नगरसेवकों की शिकायतें सुनीं और सभी दलों के साथ समान व्यवहार का आश्वासन दिया। उन्होंने एमआईएम के नगरसेवकों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने की बात कही। इसके बाद बातचीत का माहौल सामान्य हो गया।
आयुक्त से मुलाकात के बाद एमआईएम प्रतिनिधिमंडल महापौर समीर राजूरकर से मिला। नगरसेवकों ने अपने गुटनेता के लिए जल्द कक्ष उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही वंचित के गुट नेता के कक्ष पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाने के आरोप की जांच की मांग भी उठाई।
समीर साजिद ने कहा कि एमआईएम के गुटनेता को कक्ष नहीं दिया गया है, जबकि कम संख्या वाले दल के गुटनेता को करीब दो हजार वर्ग फुट का कक्ष उपलब्ध कराया गया। उन्होंने जनता के कर के धन से इतनी बड़ी राशि खर्च किए जाने पर सवाल उठाया।
एमआईएम के आरोपों पर मंत्री अतुल सावे ने ‘नवभारत’ से बातचीत में कहा कि महानगरपालिका एक स्वायत्त संस्था है। शहर के विकास कार्यों को लेकर वे मनपा आयुक्त से चर्चा करते हैं, लेकिन मनपा की राजनीति में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करते। उन्होंने एमआईएम के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि विकास कार्यों पर प्रशासन से चर्चा को राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं माना जाना चाहिए।
वंचित के गुट नेता के कक्ष पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाने के आरोप पर सावे ने कहा कि एमआईएम नगरसेवकों को यदि खर्च को लेकर कोई संदेह है तो उन्हें इसकी जानकारी स्वयं मनपा प्रशासन से लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविक खर्च की जानकारी संबंधित विभाग से प्राप्त की जा सकती है।
वंचित बहुजन आघाड़ी के गुट नेता अफसर खान ने कहा कि कक्ष नगरसेवकों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि गुटनेता के पद के आधार पर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दल के गुटनेता को कक्ष उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
महापौर समीर राजूरकर ने कहा कि सभी गुटनेताओं के कक्ष के संबंध में प्रशासन को पत्र दिया गया है। कक्ष का आकार तय करने के लिए कोई निश्चित नियमावली नहीं है। उन्होंने एमआईएम के गुटनेता को भी जल्द कक्ष उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
कक्ष आवंटन का यह विवाद अब केवल जगह के बंटवारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मनपा की कार्यप्रणाली, खर्च और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों ने इसे नया राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।