

₹500 करोड़ की कथित ऑडियो क्लिप मामले में SIT ने मनोज जरांगे से मांगे सबूत।
जरांगे ने रिकॉर्डिंग सौंपने की तैयारी जताई, सुरक्षा की लिखित गारंटी मांगी।
क्लिप में श्रीकांत शिंदे के जरिए ₹500 करोड़ देने का कथित दावा।
Manoj Jarange Patil 500 Crore Audio Clip: मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान सामने आई 500 करोड़ रुपये की कथित लेन-देन वाली ऑडियो क्लिप की जांच तेज हो गई है। मामले की पड़ताल के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अब मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल से संपर्क किया है।
जांच दल ने उनसे ऑडियो क्लिप की मूल रिकॉर्डिंग और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्य मांगे हैं। जरांगे ने जांच में सहयोग करने और रिकॉर्डिंग सौंपने की तैयारी जताई है। हालांकि, उन्होंने क्लिप का स्रोत बताने से पहले संबंधित व्यक्ति और उसके परिवार की सुरक्षा की लिखित गारंटी देने की शर्त रखी है।
एसआईटी के अधिकारियों ने मनोज जरांगे से संपर्क कर उन्हें आधिकारिक पत्र सौंपा है। इसमें पत्रकार परिषद के दौरान सुनाई गई बातचीत की पूरी ऑडियो रिकॉर्डिंग, उसकी मूल डिजिटल फाइल और उससे संबंधित अन्य साक्ष्य जांच दल को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
जरांगे ने जांच में सहयोग करने की बात कही है। उनका कहना है कि क्लिप का स्रोत बताने से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे संबंधित व्यक्ति तथा उसके परिवार की सुरक्षा की लिखित गारंटी दें। इस शर्त के बाद अब जांच दल को मूल रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिलने का इंतजार है।
कथित ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई पुलिस आयुक्त को जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेश बलकवडे के नेतृत्व में तीन वरिष्ठ अधिकारियों का विशेष जांच दल गठित किया गया।
कुछ दिन पहले मनोज जरांगे ने एक पत्रकार परिषद में फोन पर हुई बातचीत की ऑडियो क्लिप सुनाई थी। इसमें कथित तौर पर दावा किया गया था कि सांसद श्रीकांत शिंदे के माध्यम से जरांगे को 500 करोड़ रुपये दिए गए। हालांकि, यह दावा ऑडियो बातचीत में सामने आया कथित आरोप है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस क्लिप के सामने आने के बाद भाजपा और शिंदे गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे। जरांगे ने सवाल उठाया था कि कहीं किसी मध्यस्थ ने उनके नाम पर पैसे तो नहीं हड़प लिए? उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या उन्हें वास्तव में एक रुपया भी मिला है? अब एसआईटी मूल रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस पूरे मामले की जांच आगे बढ़ाना चाहती है।