

करीब दो महीने से इलाके में तेंदुए की आवाजाही से ग्रामीण परेशान थे।
वन विभाग के अनुसार तेंदुए ने लगभग 25 से 30 मवेशियों का शिकार किया था।
मौजा वाघोड़ा से मंगलवार को तेंदुए का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।
रेस्क्यू के बाद तेंदुए को जांच और उपचार के लिए ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर भेजा गया।
Nagpur Forest Department Leopard: नागपुर शहर लगभग 2 महीनों से अनेक इलाकों में आतंक मचाने वाले तेंदुआ का वन विभाग ने मंगलवार को रेस्क्यू किया था। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस तेंदुए ने लगभग ढाई दर्जन मवेशियों का शिकार किया था।
उसके लगातार हमले और मानव बस्तियों तक पहुंचने के कारण लोगों में दहशत का माहौल था। अंततः वन विभाग ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर तेंदुए को पकड़ा। तेंदुए के पिंजरे में कैद होने की खबर मिलने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
जानकारी के अनुसार पिछले करीब 2 माह से मौजा वाघोड़ा सहित डोरली, गवना, गरांडा, पिपला और हिंगना क्षेत्र में तेंदुए की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ था।
इस दौरान तेंदुए के हमलों में पशुधन के नुकसान की घटनाएं सामने आई थीं। स्थिति को गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ाते हुए तेंदुए को पकड़ने के लिए आवश्यक कार्रवाई की।
आखिरकार वन विभाग की टीम ने मौजा वाघोड़ा से तेंदुए को सुरक्षित पकड़ लिया। ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (TTC) की निगरानी में तेंदुआ तेंदुए का रेस्क्यू कर उसे वैद्यकीय जांच और आवश्यक उपचार के लिए ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (TTC) भेज दिया गया है।
फिलहाल तेंदुआ टीटीसी के अधिकारियों की निगरानी में है। उप वन संरक्षक डॉ. विनीता व्यास के मार्गदर्शन तथा सहायक वन संरक्षक गोविंदा लूचे के समन्वय में वनपरिक्षेत्र अधिकारी राहुल शिंदे, उप वन क्षेत्र अधिकारी जीवनप्रकाश मेंडे, वनरक्षक प्रकाश कालेकर, अक्षय जाधव, शिवशंकर पिल्लेवान, सूरज बेले, दीपाली नान्हे समेत अन्य ने रेस्क्यू ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पकड़े गए तेंदुए की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और पूरी तरह से स्वस्थ होने तथा चिकित्सीय औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही, ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उस क्षेत्र में वन विभाग की गश्त और निगरानी अब भी जारी है।