

कृषि उत्पादकता में बेहतरीन कार्य के लिए संभाजीनगर को राष्ट्रीय पहचान मिली है।
नई दिल्ली में जिलाधिकारी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से सम्मान स्वीकार किया।
कम उत्पादकता वाले जिलों में फसल विविधीकरण और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करना है।
Sambhajinagar Farming Productivity News: कृषि उत्पादकता बढ़ाना, सिंचाई और जल प्रबंधन को मजबूत करना, किसानों की आय में वृद्धि करना इस सफलता, के तहत प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्रपति संभाजीनगर जिले की ओर से आज जिलाधिकारी विनय गौड़ा जी.सी. ने उत्कृष्ट कार्य के लिए केंद्रिय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से सम्मान पत्र स्विकारा यह कार्यक्रम नई दिल्ली के पूसा स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में संपन्न हुआ।
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राज्य से जिले के कृषि उत्पादकता बढ़ाने के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों की विशेष रूप से सराहना की गई। कृषि उत्पादकता बढ़ाने के छह प्रमुख उद्देश्यों में से एक के तहत देश में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले जिलों में छत्रपति संभाजी नगर को शामिल किया गया है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा की, योजना के दूसरे वर्ष में जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम हासिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना यही इस योजना का वास्तविक मानदंड हैं। इस योजना के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र), चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) और ग्येजिंग (सिक्किम) जिलों का चयन किया गया। इस उपलब्धि से राज्य में कृषि विकास के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
कार्यक्रम में बिहार के गया जिले ने समग्र प्रदर्शन में पहला, राजस्थान के नागौर ने दूसरा और मध्य प्रदेश के उमरिया जिले ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा फसल विविधीकरण, टिकाऊ खेती, फसल कटाई के बाद भंडारण व्यवस्था, सिंचाई सुविधाओं, कृषि ऋण की उपलब्धता और प्रशासनिक दक्षता जैसे विभिन्न उद्देश्यों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 18 जिलों को सम्मानित किया गया।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की शुरुआत 11 अक्टूबर 2025 को की गई थी। इसका उद्देश्य देश के उन 100 जिलों में कृषि विकास को गति देना है, जहां कृषि उत्पादकता, फसल सघनता और कृषि ऋण वितरण का स्तर कम है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों व विभागों की 36 योजनाओं के साथ-साथ राज्य सरकार की संबंधित योजनाओं का समन्वय करके जिला स्तर पर कृषि विकास की योजनाएं तैयार की जाती हैं।
कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करना, फसल कटाई के बाद भंडारण सुविधाओं का विस्तार करना, सिंचाई व्यवस्था में सुधार करना और किसानों को अल्पकालीन और दीर्घकालीन कृषि ऋण उपलब्ध कराना योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं।