

Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation: छत्रपति संभाजीनगर शहर के बाहरी इलाकों में तेजी से बढ़ रही अवैध प्लाटिंग के बीच महानगरपालिका आयुक्त अमोल येडगे ने नागरिकों को सतर्क किया है। उन्होंने साफ कहा कि बिना दस्तावेजों की जांच किए अवैध प्लॉट खरीदना नागरिकों के लिए भारी नुकसान का सौदा साबित हो सकता है। दिसंबर 2020 के बाद विकसित की गई अवैध कॉलोनियों और उनमें बेचे गए अवैध प्लॉट पर किए गए निर्माण को वैध नहीं होंगे। ऐसे प्लॉट पर निर्माण होने की स्थिति में महानगरपालिका प्रशासन उसे अवैध मानकर उसे ध्वस्त करेंगा।
आयुक्त येडगे ने नागरिकों से अपील की है कि बाहरी क्षेत्रों में प्लॉट खरीदते समय केवल विक्रेता के भरोसे पर निर्णय न लें। जमीन के स्वामित्व, लेआउट, मंजूरी, विकास अनुमति और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की पूरी जांच करने के बाद ही प्लॉट खरीदें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाद में यदि खरीदा गया प्लॉट अवैध पाया गया और उस पर निर्माण किया गया तो निर्माण को भी अवैध माना जाएगा। ऐसी स्थिति में होने वाले आर्थिक नुकसान के लिए महानगरपालिका प्रशासन जिम्मेदार नहीं रहेगा।
शहर के बाहरी क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग रोकने के लिए महानगर पालिका के अतिक्रमण विभाग की निगरानी में विशेष दस्ता गठित किया गया है। यह दस्ता शहर की सीमा और बाहरी क्षेत्रों में जमीनों की होने वाली अवैध कटिंग, प्लॉटिंग और बिक्री पर नजर रख रहा है। जहां भी नियमों का उल्लंघन कर प्लाटिंग किए जाने की जानकारी मिल रही है, वहां कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन का मानना है कि अवैध प्लॉटिंग करने वाले लोग नागरिकों को आकर्षक दरों और सुविधाओं का लालच देकर जमीन बेचते हैं। बाद में खरीदार को पता चलता है कि संबंधित जमीन का लेआउट मंजूर नहीं है या वहां निर्माण की अनुमति ही नहीं है। ऐसी स्थिति में नागरिक की पूरी जमा पूंजी फंस सकती है।
गुंठेवारी कानून के तहत दिसंबर 2020 तक अस्तित्व में आई अवैध कॉलोनियों और वहां की संपत्तियों को निर्धारित प्रक्रिया एवं शुल्क के आधार पर नियमित करने का प्रावधान है। हालांकि, इसके बाद विकसित की गई अवैध कॉलोनियों और अवैध प्लॉट पर बने निर्माण को इसी आधार पर वैध नहीं कराया जा सकता। इसलिए नागरिकों को यह समझना जरूरी है कि हर अवैध संपत्ति को गुंठेवारी के माध्यम से नियमित कराने का रास्ता खुला नहीं है।
आयुक्त येडगे ने नागरिकों से कहा है कि किसी भी प्लॉट की खरीद से पहले संबंधित जमीन और प्रस्तावित निर्माण की वैधता की जानकारी हासिल करें। केवल रजिस्ट्री हो जाने से यह साबित नहीं होता कि प्लॉटिंग या निर्माण पूरी तरह वैध है।
इधर, गुंठेवारी क्षेत्रों में पहले से बने मकानों को नियमित कराने के लिए नागरिकों को राहत देने की दिशा में भी महानगरपालिका प्रशासन विचार कर रहा है। नियमितीकरण के लिए निर्धारित बेंटरमेंट शुल्क और विकास शुल्क में अतिरिक्त छूट देने के मुद्दे पर महापौर समीर राजूरकर के साथ चर्चा किए जाने की जानकारी मनपा आयुक्त अमोल येडगे ने दी। इस संबंध में आगामी महानगरपालिका आम सभा में प्रस्ताव रखा जाएगा। आम सभा में चर्चा के बाद जो निर्णय होगा, उसी के आधार पर शुल्क में राहत अथवा अन्य व्यवस्था को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्लॉट खरीदने से पहले जमीन के सभी दस्तावेजों की जांच करें।
संबंधित लेआउट और प्लॉटिंग की मंजूरी की जानकारी ले।
केवल रजिस्ट्री होने को जमीन की वैधता का प्रमाण न मानें।
दिसंबर 2020 के बाद की अवैध प्लाटिंग के मामले में विशेष सावधानी बरतें।
संदेह होने पर महानगरपालिका प्रशासन से जमीन की स्थिति की जानकारी लें।
बिना मंजूरी वाले प्लॉट पर निर्माण करने से बचें।
महानगरपालिका प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सस्ते प्लॉट के लालच में खरीदार बाद में बड़ी कानूनी और आर्थिक परेशानी में फंस सकता है। इसलिए पहले दस्तावेजों की जांच, फिर प्लॉट की खरीद ही नागरिकों के हित में सबसे सुरक्षित रास्ता है।