

पानी की बर्बादी नहीं रुकी तो तीन के बजाय सात दिन बाद जलापूर्ति की नौबत आने की चेतावनी।
सिडको क्षेत्र में पानी बर्बाद होते देख आयुक्त अमोल येडगे ने नागरिकों को आगाह किया।
दूषित पानी की शिकायतों के बाद करीब 100 किलोमीटर जलवाहिनियां बदलने की तैयारी।
नई जलापूर्ति योजना के तहत लगभग 1,900 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने की योजना।
करीब 1,200 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा होने की जानकारी।
Chhatrapati Sambhajinagar NMC Contaminated Water Pipeline: छत्रपति संभाजीनगर में पानी की उपलब्धता को लेकर मनपा आयुक्त अमोल येडगे ने नागरिकों को पानी बचाने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि पानी की बर्बादी जारी रही तो तीन दिन के बजाय सात दिन के अंतराल पर जलापूर्ति करनी पड़ सकती है। दूषित पानी की शिकायतों के बाद करीब 100 किलोमीटर जलवाहिनियां बदलने की तैयारी भी की जा रही है।
छत्रपति संभाजीनगर शहर में पानी की कमी का संकट गहराने से पहले ही महानगरपालिका ने नागरिकों को सतर्क करना शुरू कर दिया है। मनपा आयुक्त अमोल येडगे ने चेतावनी दी है कि यदि पानी की बर्बादी नहीं रुकी, तो वर्तमान में तीन दिन के अंतराल पर होने वाली जलापूर्ति को सात दिन के अंतराल पर करना पड़ सकता है।
आयुक्त ने नागरिकों से अपील की कि जलापूर्ति के दौरान पानी का जरूरत के मुताबिक भंडारण करें और उपलब्ध पानी को बिना कारण न बहाएं। शहर में पानी की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रशासन ने जल संरक्षण पर जोर दिया है।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण करते समय आयुक्त अमोल येडगे ने सिडको क्षेत्र में पानी की बर्बादी देखी। पूछताछ के दौरान संबंधित नागरिक ने बताया कि घर में पहले से रखा पानी फेंककर नया पानी भरा जा रहा था।
सीमित जलापूर्ति के बीच उपयोग योग्य पानी को केवल नया पानी भरने के लिए बहा देना प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। आयुक्त ने नागरिकों से कहा कि घर में उपलब्ध पानी को बिना आवश्यकता न फेंकें और दैनिक इस्तेमाल में भी बचत बरतें।
प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध जल का सावधानीपूर्वक उपयोग करना जरूरी है। यदि पानी का अनावश्यक इस्तेमाल जारी रहा, तो जलापूर्ति के बीच का अंतराल बढ़ाने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
शहर में केवल पानी की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी मनपा के सामने बड़ी चुनौती है। विभिन्न क्षेत्रों से दूषित पानी मिलने की शिकायतों के बाद किए गए सर्वेक्षण में करीब 100 किलोमीटर लंबी जलवाहिनियों को बदलने की आवश्यकता सामने आई है।
आयुक्त अमोल येडगे के अनुसार, इन जलवाहिनियों को बदलने का काम भी हाथ में लिया जाएगा। इसका उद्देश्य जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार करना और नागरिकों तक स्वच्छ पानी पहुंचाना है।
नई जलापूर्ति योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण ने शहर में लगभग 1,900 किलोमीटर लंबी जलवाहिनियां बिछाने की योजना बनाई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसमें से करीब 1,200 किलोमीटर पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है।
शेष कार्यों को पूरा करने के साथ पुरानी और दूषित जलवाहिनियों को बदलना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा। शहर में पानी की उपलब्धता बनाए रखने और स्वच्छ जल पहुंचाने के लिए जल संरक्षण तथा पाइपलाइन सुधार, दोनों पर ध्यान दिया जा रहा है।
जिले में सूखे जैसी स्थिति के बीच पानी की हर बूंद का महत्व बढ़ गया है। मनपा ने नागरिकों से अपील की है कि वे जरूरत के अनुसार ही पानी का भंडारण करें, टंकियों को अनावश्यक रूप से भरकर पानी न बहने दें और घर में उपलब्ध पानी का दोबारा उपयोग संभव हो तो करें।
आयुक्त की चेतावनी के मुताबिक, पानी की बर्बादी नहीं रुकी तो शहरवासियों को अगली जलापूर्ति के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। फिलहाल तीन दिन के अंतराल पर मिलने वाले पानी को सात दिन के अंतराल पर देने की आशंका जताई गई है।