2047 तक बदल जाएगी छत्रपति संभाजीनगर की तस्वीर! जलापूर्ति से निवेश तक, तैयार हुआ विकास का मेगा प्लान

Viksit Chhatrapati Sambhajinagar 2047: संभाजीनगर को 2047 तक आधुनिक और आत्मनिर्भर महानगर बनाने की तैयारी है। मनपा ने मित्र संस्था के साथ समझौता कर विशेष नगर परिवर्तन प्रकोष्ठ बनाने का फैसला किया है।
Chhatrapati Sambhajinagar Development Plan 2047 MITRA Maharashtra
समझौते के दौरान की फोटो(सोर्स: नवभारत)
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Highlights

  • संभाजीनगर ने वर्ष 2047 तक आधुनिक विकास के लिए ऐतिहासिक समझौता किया।

  • यह अनोखा और महत्वपूर्ण करार करने वाली देश की पहली महानगरपालिका बनी है।

  • इस मेगा प्लान के तहत शहर में विशेष नगर परिवर्तन प्रकोष्ठ की स्थापना होगी।

Chhatrapati Sambhajinagar Development Plan 2047: छत्रपति संभाजीनगर आने वाले दो दशकों में छत्रपति संभाजीनगर की पहचान केवल ऐतिहासिक और औद्योगिक नगर के रूप में ही नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित महानगर के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

वर्ष 2047 तक शहर की तस्वीर बदलने के उद्देश्य से छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका ने महाराष्ट्र सरकार की संस्था ‘मित्र’ के साथ महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस पहल के अंतर्गत शहर में विशेष नगर परिवर्तन प्रकोष्ठ की स्थापना की जाएगी। इसके माध्यम से अगले दो दशकों के विकास की रूपरेखा तैयार करने के साथ ही योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सुनियोजित कार्य योजना बनाई जाएगी।

प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी में हुआ करार

महापौर समीर राजूरकर की पहल पर मुंबई में हुए इस समझौते को ‘विकसित छत्रपति संभाजीनगर 2047’ के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस प्रकार का समझौता करने वाली छत्रपति संभाजीनगर देश की पहली महानगरपालिका है।

समझौते पर ‘मित्र’ संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीणसिंह परदेशी, अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान के प्रबंध निदेशक डॉ। जयराज फाटक, महापौर समीर राजूरकर और मनपा आयुक्त तथा स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमोल येडगे ने हस्ताक्षर किए।

शहर के विकास के लिए बनेगा विशेष प्रकोष्ठ

इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष नगर परिवर्तन प्रकोष्ठ की स्थापना है। यह प्रकोष्ठ महानगरपालिका को नीतिगत दिशा देने के साथ तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराएगा। शहर की वर्तमान स्थिति का आकलन, भविष्य की आवश्यकताओं का निर्धारण, विकास परियोजनाओं की पहचान, प्राथमिकता तय करना और उनके क्रियान्वयन की निगरानी इसकी प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी।

इस व्यवस्था में ‘मित्र’ संस्था राज्य सरकार की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप मार्गदर्शन करेगी, जबकि अखिल भारतीय स्थानीय स्वशासन संस्थान तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। महानगरपालिका और स्मार्ट सिटी संस्था के बीच भी समन्वय स्थापित किया जाएगा।

पांच वर्षीय विकास योजना से तय होगी दिशा

शहर के लिए पहले व्यापक आधार भूत मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें सड़कों, जलापूर्ति, सार्वजनिक सुविधाओं, महानगरपालिका की आर्थिक स्थिति और नागरिक सेवाओं की मौजूदा व्यवस्था का अध्ययन होगा। इसके आधार पर पांच वर्षीय नगर विकास एवं निवेश योजना तैयार की जाएगी। इसमें आवश्यक परियोजनाओं, उनकी लागत और संभावित वित्तीय स्रोतों का निर्धारण किया जाएगा। साथ ही वर्ष 2047 तक के विकास का दृष्टि पत्र भी तैयार होगा।

कर वसूली और भूमि से बढ़ेगी मनपा की आय

महानगरपालिका की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए संपत्ति कर व्यवस्था में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कर के दायरे से बाहर रहने वाली और कम कर चुकाने वाली संपत्तियों की पहचान कर वसूली व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा।

इसके अलावा मनपा के स्वामित्व वाली जमीनों की पहचान, मानचित्रण और मूल्यांकन कर व्यवस्थित भूमि बैंक बनाया जाएगा। इन जमीनों का आर्थिक उपयोग करके विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

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पानी की बर्बादी रोकने और पुनः उपयोग पर जोर

शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने के लिए वितरण प्रणाली में होने वाले रिसाव को कम करने, पानी की बर्बादी रोकने और गुणवत्ता सुधारने पर काम होगा। वहीं, मलजल शोधन केंद्रों से उपचारित पानी का उद्योगों, निर्माण कार्यों, उद्यानों और अन्य गैर-पेय कार्यों में उपयोग बढ़ाने की योजना बनाई जाएगी। इससे स्वच्छ पानी की मांग का दबाव कम करने के साथ आय के नए स्रोत भी विकसित किए जा सकेंगे।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुटाएंगे निवेश

विकास परियोजनाओं के लिए विश्व बैंक, बहुपक्षीय विकास संस्थाओं और केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं से आर्थिक सहायता प्राप्त करने के विकल्प तलाशे जाएंगे। शहरी चुनौती कोष और विकास केंद्र पहल के अंतर्गत भी निवेश योग्य परियोजनाएं तैयार की जाएंगी। इसके साथ ही उपलब्ध वित्तीय योजनाओं का लाभ उठाने के लिए विशेष प्रयास होंगे।

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योजनाओं के क्रियान्वयन और परिणाम पर रहेगा जोर

इस समझौते का उद्देश्य केवल नई परियोजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि शहर की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं को प्राथमिकता देकर उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करना है। आर्थिक आत्मनिर्भरता, आधुनिक आधारभूत सुविधाएं, बेहतर नागरिक सेवाएं और निवेश के नए अवसर इस पहल के प्रमुख लक्ष्य होंगे। प्रस्तावित व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होने पर वर्ष 2047 तक छत्रपति संभाजीनगर को आर्थिक रूप से मजबूत, सुव्यवस्थित और आधुनिक महानगर बनाने की दिशा में नई गति मिल सकती है।