Chasakman Dam Water Level: पुणे जिले में बढ़ी पानी की चिंता, चासकमान बांध में सिर्फ 18.32% जल भंडार शेष
Chasakman Dam Water Level News: पुणे जिले के चासकमान बांध का जलस्तर तेजी से घट रहा है। बढ़ती गर्मी और सिंचाई की मांग के चलते खेड और शिरूर तहसीलों में आने वाले दिनों में गंभीर जल संकट की आशंका बढ़ गई।
- Written By: अपूर्वा नायक
चासकमान बांध का जलस्तर तेजी से घट रहा (सौ. सोशल मीडिया )
Chasakman Dam Water Level Falls: जिले खेड और शिरूर तहसीलों की जीवन रेखा माने जाने वाले चासकमान बांध में जलस्तर तेजी से गिर रहा है। वर्तमान में इस बांध में केवल 18.32 प्रतिशत उपयोगी जल भंडार शेष रह गया है।
भीषण गर्मी, बढ़ते वाष्पीकरण और कृषि कार्यों के लिए पानी की बढ़ती मांग के कारण आगामी समय में इन दोनों तहसीलों पर गंभीर जल संकट मंडराने की आशंका जताई जा रही है। यदि मानसून में देरी होती है, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है, जिससे स्थानीय किसानों और नागरिकों में चिंता का माहौल है।
चासकमान बांध की कुल क्षमता 8.54 टीएमसी है, जो खेड और शिरूर तहसीलों के लगभग 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र के लिए सिंचाई का मुख्य आधार है। वर्तमान में, बांध की बाई नहर से 560 क्यूसेक की गति से पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी गन्ना, सब्जियों, फलों के बागों और गर्मी की अन्य फसलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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प्रशासन के सामने पानी के सटीक नियोजन की चुनौती
खेती के साथ-साथ बांध के सीमावर्ती गांवों में पीने के पानी की समस्या भी विकराल रूप लेती दिख रही है। चासकमान बांध से भीमा नदी के पात्र में छोड़े जाने वाले पानी पर कई गांवों की पेयजल योजनाएं निर्भर हैं। भीमा नदी पर बने कोल्हापुरी पद्धति के बांध में जमा पानी गर्मियों के दौरान गांवों के लिए जीवनदायी साबित होता है। लेकिन घटते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन के सामने पानी के सटीक नियोजन की चुनौती खड़ी हो गई है।
क्षेत्र के अन्य बांधों की स्थिति
जिले के अन्य बांधों की तुलनात्मक स्थिति पर नजर डालें तो चासकमान की तुलना में वे कुछ बेहतर स्थिति में है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भामा आसखेड बांध में 46.10 प्रतिशत और कलमोडी बांध में 74.59 प्रतिशत जल संचय उपलब्ध है। पिछले साल इसी अवधि में चासकमान बांध में केवल 9.49 प्रतिशत पानी ही शेष था। लेकिन इस वर्ष पिछले साल की तुलना में जल संचय अधिक है, लेकिन असामान्य रूप से बढ़ती गर्मी और पानी की खपत से जल भंडार कम हो रहा है।
जल ही जीवन का आधार है और घटता जलस्तर हमारे न भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी। आज का संयमित जल उपयोग ही कल की खुशहाली सुनिश्चित करेगा। – प्रसाद कदम, स्थानीय नागरिक
दीर्घकालिक नियोजन की आवश्यकता
किसानों का कहना है कि यदि मानसून समय पर शुरू नहीं हुआ, तो इस वर्ष बड़े पैमाने पर अकाल जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन को केवल अस्थायी समाधान के बजाय जल संरक्षण के लिए दीर्घकालिक नियोजन करना चाहिए।
साथ ही, जनता से भी अपील की जा रही है कि वे पानी का उपयोग अत्यंत मितव्ययिता के साथ करें ताकि मानसून आने तक वर्तमान स्टॉक का प्रबंधन किया जा सके।
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पानी की चोरी रोकने पर प्रशासन की नजर
सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए चासकमान बांध से 590 क्यूसेक और भामा आसखेड बांध से 1000 क्यूसेक की गति से नदी पात्र में पानी छोड़ा जा रहा है। यह निर्णय गर्मी में फसलों को बचाने के लिए लिया गया है। प्रशासन अब पानी की चोरी रोकने और अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए निगरानी बढ़ा सकता है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम सदुपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
