चंद्रपुर बीजेपी में महाभारत: मुनगंटीवार-जोरगेवार जंग के आगे प्रदेशाध्यक्ष फेल, अब दिल्ली करेगा फैसला
Chandrapur BJP Internal Conflict: चंद्रपुर बीजेपी की गुटबाजी चरम पर, सुधीर मुनगंटीवार और किशोर जोरगेवार के विवाद पर रवींद्र चव्हाण ने जताई हतबलता। जानें क्यों कोई नेता नहीं बनना चाहता यहाँ निरीक्षक ।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सुधीर मुनगंटीवार व किशोर जोरगेवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Chandrapur BJP Internal Conflict News: चंद्रपुर बीजेपी में चल रही गुटबाजी को लेकर नागपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में विधायक किशोर जोरगेवार अपने 17 समर्थक पार्षदों के साथ प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण से मिलने पहुंचे थे। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान चव्हाण ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि चंद्रपुर का यह विवाद अब उनके नियंत्रण से बाहर हो चुका है। उन्होंने संकेत दिए कि राज्य स्तर पर इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है, इसलिए अब इस पर अंतिम फैसला सीधे दिल्ली (केंद्रीय नेतृत्व) द्वारा लिया जाएगा।
नगर निगम चुनाव में हार बनी विवाद की मुख्य वजह
इस संघर्ष की ताजा चिंगारी चंद्रपुर नगर निगम के जोन समिति और महिला एवं बाल कल्याण समिति के चुनावों से भड़की। संख्याबल पक्ष में होने के बावजूद, मुनगंटीवार और जोरगेवार गुटों के बीच आपसी खींचतान के कारण बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने पार्टी की किरकिरी कराई और अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए। जोरगेवार गुट का आरोप है कि उन्हें पार्टी के भीतर दरकिनार किया जा रहा है, जबकि मुनगंटीवार समर्थक अपनी वरिष्ठता का हवाला दे रहे हैं।
‘निरीक्षक’ बनने को कोई तैयार नहीं
चंद्रपुर बीजेपी की स्थिति इतनी विस्फोटक हो गई है कि पार्टी का कोई भी बड़ा नेता वहां ‘निरीक्षक’ (Observer) बनकर जाने को तैयार नहीं है। हाल ही में पूर्व राज्यमंत्री मदन येरावार को निरीक्षक नियुक्त किया गया था, लेकिन मुनगंटीवार और जोरगेवार के बीच जारी तीखे टकराव को देखते हुए उन्होंने पदभार संभालने के बजाय इस्तीफा देना बेहतर समझा। रवींद्र चव्हाण ने भी स्वीकार किया कि मुनगंटीवार जैसे कद्दावर और वरिष्ठ नेता के खिलाफ या उनके मामले में हस्तक्षेप करने की हिम्मत राज्य का कोई भी नेता नहीं जुटा पा रहा है।
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अब दिल्ली से होगा ‘फाइनल सेटलमेंट’
सुधीर मुनगंटीवार बीजेपी के अत्यंत वरिष्ठ नेता हैं और उनके प्रभाव को देखते हुए प्रदेश स्तर पर कोई भी कार्रवाई करना मुश्किल साबित हो रहा है। रवींद्र चव्हाण ने स्पष्ट किया कि चंद्रपुर से जुड़े हर विषय की रिपोर्ट अब सीधे केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली का हाईकमान इस आंतरिक कलह को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है और चंद्रपुर बीजेपी की कमान किसके हाथों में सुरक्षित रहती है।
